Gurugram News: हरियाणा के गुरुग्राम स्थित बादशाहपुर तहसील में आयकर विभाग के एक सर्वे ने प्रशासनिक और वित्तीय हलकों में हड़कंप मचा दिया है। जमीन-जायदाद के खरीद-फरोख्त में अब तक के सबसे अनोखे और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए आयकर विभाग ने पाया कि बीते दो वर्षों के दौरान करीब 25 हजार रजिस्ट्रियों में एक ही फर्जी पैन कार्ड नंबर—ABCDEF1234—का इस्तेमाल किया गया है। इस फर्जी नंबर की आड़ में बेहद उच्च मूल्य (हाई-वैल्यू) की जमीनों और संपत्तियों की धड़ल्ले से रजिस्ट्रियां कराई गईं ताकि असली खरीदार और विक्रेता आयकर विभाग की नजरों से बच सकें।
मामले की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आयकर विभाग (gurugram income tax survey) चंडीगढ़ के निदेशक ने तुरंत हरकत में आते हुए 7 सदस्यीय विशेष अधिकारियों की टीम गठित कर बादशाहपुर तहसील में जांच के लिए उतार दिया है। विभाग की यह स्पेशल टीम लगातार दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि इस खेल के पीछे छिपे बड़े भू-माफियाओं और अधिकारियों की साठगांठ का पर्दाफाश किया जा सके।
15 हजार करोड़ का सीधा लेन-देन छिपाया, 55 हजार करोड़ की रिपोर्टिंग पर उठे सवाल
शुरुआती पड़ताल में जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच के मुताबिक करीब 12 हजार ऐसी संपत्तियां हैं जिनके जरिए लगभग 15 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम लेनदेन किए गए, लेकिन इसकी भनक तक आयकर विभाग को नहीं लगने दी गई। (fake pan card registry scam) इसके अलावा 35 हजार अन्य संपत्तियों के सौदों की जांच की गई तो पता चला कि या तो इन ट्रांजेक्शनों को विभाग को रिपोर्ट ही नहीं किया गया, या फिर जानबूझकर गलत पैन नंबर दर्ज किए गए। इन सभी संदिग्ध ट्रांजेक्शनों को मिलाकर करीब 55 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का अनुमान लगाया जा रहा है।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार की भूमिका की भी शुरू हुई जांच
इतने बड़े पैमाने पर एक ही फर्जी पैन नंबर से लगातार रजिस्ट्रियां होती रहीं और स्थानीय अफसरों को इसकी भनक न लगे, यह बात गले नहीं उतर रही। (badshahpur land scam haryana) यही वजह है कि अब तत्कालीन और वर्तमान तहसीलदार व नायब तहसीलदार की कार्यप्रणाली की भी गहराई से जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह महज एक तकनीकी खामी थी या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से काली कमाई को ठिकाने लगाने का संगठित जरिया बनाया गया था।
आयकर विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस पूरे फर्जीवाड़े से हरियाणा के मुख्य सचिव को अवगत करा दिया है ताकि प्रशासनिक स्तर पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। हालांकि राज्य सरकार की ओर से मई 2026 तक की वित्तीय लेनदेन विवरण (SFT) रिपोर्ट विभाग को सौंपी गई है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि उसमें पूर्ण पारदर्शिता का अभाव है।
विभाग के मुताबिक प्रदेश के 140 तहसीलदारों ने तो समय से पहले अपनी एसएफटी रिपोर्ट फाइल कर दी है, जबकि 120 तहसीलदार अंतिम तिथि तक ही रिपोर्ट भेजते हैं। विभाग ने सख्त लहजे में कहा है कि जिन भी रजिस्ट्रियों में खामियां मिली हैं, उनके रिकॉर्ड को दोबारा पारदर्शी तरीके से दुरुस्त किया जाए और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों व जमीन खरीदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
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