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Kotak Mahindra Bank Scam Haryana: कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले पर हरियाणा सरकार सख्त: ACB करेगी जांच, गायब हुईं निगम की करोड़ों की FD

AAmandeep Singh
कोटक महिंद्रा बैंक घोटाले पर हरियाणा सरकार सख्त: ACB करेगी जांच, गायब हुईं निगम की करोड़ों की FD
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पंचकूला। हरियाणा के सरकारी महकमों में वित्तीय अनुशासन को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी विभागों के 590 करोड़ रुपये के पुराने घोटाले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि कोटक महिंद्रा बैंक और पंचकूला नगर निगम के बीच का यह नया विवाद सामने आ गया। मामला सीधे तौर पर नगर निगम की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ा है। राज्य सरकार ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच का जिम्मा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को सौंप दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर अब इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

16 में से 5 एफडी गायब, निगम अधिकारियों के उड़े होश

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पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पंचकूला नगर निगम के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा में जमा खातों की ऑडिट की गई। जानकारी के मुताबिक, निगम ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से अपनी 16 एफडी इस बैंक में ट्रांसफर की थीं। जब रिकॉर्ड खंगाले गए, तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई—16 में से 5 एफडी का बैंक के सिस्टम में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं था। निगम ने तुरंत इसकी सूचना बैंक प्रबंधन और हरियाणा सरकार को दी, जिसके बाद पहले डीसीपी कार्यालय और फिर गृह विभाग ने इसे बड़ी साजिश मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया।

बैंक की सफाई: ‘हम जांच में कर रहे हैं पूरा सहयोग’

इधर, आरोपों के घेरे में आए कोटक महिंद्रा बैंक ने बुधवार को अपना पक्ष रखते हुए स्पष्टीकरण जारी किया। बैंक प्रवक्ता का कहना है कि लेनदेन के दौरान सभी बैंकिंग मानकों और नियमों का पूरी तरह पालन किया गया है। बैंक ने दावा किया कि निगम की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए त्रुटियों को दूर करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दी गई है और समीक्षागत राशि का एक बड़ा हिस्सा वापस निगम के खातों में हस्तांतरित (Transfer) भी कर दिया गया है। बैंक ने अपनी छवि साफ रखने के लिए खुद भी पंचकूला पुलिस को औपचारिक शिकायत दी है ताकि स्वतंत्र जांच हो सके।

कड़ियों को जोड़ने में जुटी ACB

अब इस मामले की फाइल ACB के पास है। ब्यूरो इस बात की गहराई से पड़ताल करेगा कि आखिर सरकारी एफडी बैंक के रिकॉर्ड से कैसे ‘गायब’ हुईं और क्या इसमें निगम के कुछ अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं? जांच का एक मुख्य सिरा यह भी है कि क्या यह महज कोई तकनीकी त्रुटि है या फिर इसके पीछे किसी बड़े वित्तीय सिंडिकेट का हाथ है। फिलहाल, बैंक और निगम के बीच कागजी रस्साकशी जारी है, लेकिन सरकार के इस कड़े रुख ने भ्रष्ट अधिकारियों और बैंकिंग लापरवाहियों पर शिकंजा कस दिया है।

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