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Haryana Assembly Budget Session: हरियाणा विधानसभा सत्र संपन्न: ₹2.79 लाख करोड़ का बजट पास, जानें आम आदमी पर क्या होगा असर

AAmandeep Singh
हरियाणा विधानसभा सत्र संपन्न: ₹2.79 लाख करोड़ का बजट पास, जानें आम आदमी पर क्या होगा असर
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र अपने निर्धारित कामकाज को पूरा करने के बाद समाप्त हो गया। इस बार का सत्र विधायी कार्यों और चर्चाओं के लिहाज से काफी व्यस्त रहा। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सत्र के समापन के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बताया कि सदन ने कुल 13 दिनों की बैठकों में लगभग 55 घंटे तक जनहित के मुद्दों पर संवाद किया। सरकार ने न केवल विपक्ष के सवालों के जवाब दिए, बल्कि प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए कई बड़े विधायी कदम भी उठाए। सदन में पारित किए गए प्रस्तावों में हरियाणा आवासन बोर्ड को भंग करना और पुराने पड़ चुके सफाई कर्मचारी नियोजन अधिनियम 1993 को निरस्त करना शामिल है।

भारी-भरकम बजट और खर्च की मिली हरी झंडी

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सत्र के दौरान सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि हरियाणा विनियोग (संख्या 2) विधेयक, 2026 का पारित होना रहा। इस विधेयक के पास होने के साथ ही अब राज्य सरकार को 31 मार्च, 2027 तक चलने वाले वित्त वर्ष के लिए ₹2,79,602,43,26,340 (दो लाख उनासी हजार छह सौ दो करोड़ रुपये से अधिक) की भारी-भरकम राशि संचित निधि से खर्च करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बजट बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कोर सेक्टर्स में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का जोर

प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर रखने और कर्ज के प्रबंधन के लिए हरियाणा राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पारित किया गया। साल 2005 के मूल अधिनियम में यह संशोधन 12वें वित्त आयोग की उन सिफारिशों को ध्यान में रखकर किया गया है, जिनका लक्ष्य राजस्व घाटे को शून्य पर लाना और राजकोषीय घाटे को एक तय सीमा के भीतर रखना है। सरकार का तर्क है कि इस विधायी बदलाव से भविष्य में राज्य की वित्तीय साख मजबूत होगी और बजट प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता आएगी।

पुराने कानूनों की विदाई और जीएसटी में सुधार

विधायी कार्यों की फेहरिस्त में केवल बजट ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार भी शीर्ष पर रहे। सरकार ने टैक्स ढांचे को सरल बनाने के लिए जीएसटी से जुड़े संशोधनों को भी सदन से पास कराया। वहीं, प्रशासनिक खर्चों को कम करने के लिए कुछ बोर्ड और पुराने कानूनों को हटाने का निर्णय लिया गया। सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में सत्ता पक्ष ने अपनी नीतियों को पुरजोर तरीके से रखा, जबकि विपक्ष ने भी विभिन्न कटौतियों और सुझावों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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