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Haryana CLU process rules: हरियाणा में उद्योगों को बड़ी राहत: अब 19 नहीं, सिर्फ 3 दस्तावेजों में मिलेगी CLU मंजूरी

GGaganpreet Kaur
हरियाणा में उद्योगों को बड़ी राहत: अब 19 नहीं, सिर्फ 3 दस्तावेजों में मिलेगी CLU मंजूरी
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हरियाणा में उद्योग लगाने या व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने के इच्छुक निवेशकों और आम लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने सालों पुरानी जटिल और सिरदर्द बन चुकी चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) की प्रक्रिया पर कैंची चला दी है। प्रशासनिक सुधारों के तहत सरकार ने फैसला लिया है कि अब फाइलों को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घुमाने की जरूरत नहीं होगी। इस बड़े फैसले से न केवल मंजूरी की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और लेटलतीफी की गुंजाइश भी खत्म होगी।

मुख्य सचिव ने कसी कमर, अधिकारियों को मिले कड़े निर्देश

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इस नीतिगत बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कमर कस ली है। कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक के साथ मिलकर संबंधित विभागों को ‘रेगुलेटरी रिफॉर्म’ यानी विनियामक सुधारों को तुरंत लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। सरकार की कोशिश है कि कारोबारियों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाया जाए और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की रैंकिंग में हरियाणा को देश के शीर्ष राज्यों में बनाए रखा जाए।

सूबे के एक बड़े हिस्से में अब किसी परमिशन की जरूरत नहीं

इस फैसले का सबसे क्रांतिकारी पहलू यह है कि हरियाणा का लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र अब CLU के दायरे से पूरी तरह बाहर हो गया है। यानी इतने बड़े इलाके में नई फैक्ट्रियां या व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलने के लिए निवेशकों को इस सरकारी अनुमति की जरूरत ही नहीं होगी। जानकारों का मानना है कि इस कदम से राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) की बाढ़ आ सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

ऑटो-CLU और खुद की गारंटी पर मिलेगी मंजूरी

नई व्यवस्था के तहत औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ‘ऑटो-CLU’ प्रणाली शुरू की जा रही है, जहां तय मापदंड पूरे होते ही सिस्टम खुद-ब-खुद मंजूरी जनरेट कर देगा। इसके साथ ही, कम जोखिम वाली इमारतों के लिए अब ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) हासिल करना भी आसान हो गया है। मकान या बिल्डिंग मालिक अब स्व-प्रमाणीकरण (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) के आधार पर इसे जारी करा सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा से समझौता न हो, इसके लिए केवल उच्च जोखिम वाली श्रेणी की इमारतों में ही ‘थर्ड पार्टी’ यानी बाहरी विशेषज्ञों से जांच कराने की व्यवस्था अनिवार्य रहेगी। 

प्रदूषण बोर्ड ने भी दिखाई तेजी, एनओसी का समय घटा

सरलीकरण का यह दौर सिर्फ जमीनी कागजातों तक सीमित नहीं है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी उद्योगों के अनुकूल कदम उठाते हुए ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ (स्थापना की सहमति) और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (संचालन की सहमति) देने के नियमों में ढील दी है। अब उद्योगों को प्रदूषण से जुड़ी ये दोनों मंजूरियां 30 कार्य दिवस के बजाय महज 21 दिनों के भीतर मिल जाएंगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का मानना है कि इन साझा प्रयासों से जहां निवेशकों का कीमती समय और पैसा बचेगा, वहीं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

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