Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Haryana Electricity Bill Charges: सावधान! 300 यूनिट पार करते ही लगेगा भारी फिक्स चार्ज, हरियाणा बिजली बिलों ने बढ़ाई टेंशन

AAmandeep Singh
सावधान! 300 यूनिट पार करते ही लगेगा भारी फिक्स चार्ज, हरियाणा बिजली बिलों ने बढ़ाई टेंशन
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

हरियाणा। हरियाणा के आम आदमी की रसोई का बजट पहले से ही बिगड़ा हुआ है, ऊपर से बिजली निगम के ‘चार्जेज’ वाले करंट ने जनता की कमर तोड़ दी है। प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं के मन में इस समय एक ही सवाल है कि आखिर बिजली का बिल सिर्फ खपत का क्यों नहीं आता? ताजा बिलों को देखें तो मूल बिजली खर्च के साथ-साथ फ्यूल सरचार्ज, फिक्स चार्ज और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी जैसी मदों में मोटी रकम वसूली जा रही है।

जानकारों के मुताबिक, कोयले की कीमतों में उतार-चढ़ाव के नाम पर उपभोक्ताओं से लगभग 40 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लिया जा रहा है। यह बोझ उन परिवारों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।

विज्ञापन

गांवों के बिल में ‘म्यूनिसिपल टैक्स’ का खेल, ग्रामीण परेशान

हैरानी की बात तो यह है कि बिजली निगम की बिलिंग प्रणाली अब गांवों और शहरों का फर्क भी भूलती नजर आ रही है। नियमानुसार, शहरों में म्यूनिसिपल टैक्स और गांवों में पंचायत टैक्स वसूला जाता है। लेकिन इस बार गांवों में बांटे गए बिलों में ‘पंचायत टैक्स’ गायब है और उसकी जगह ‘म्यूनिसिपल टैक्स’ ने ले ली है।

ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ता जब बिल लेकर बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो वहां तैनात कर्मचारी भी इस तकनीकी फेरबदल पर चुप्पी साधे हुए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना किसी सूचना के टैक्स के नाम बदलना न केवल संदेह पैदा करता है बल्कि निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है।

इन मदों में कट रही आपकी जेब, समझें बिल का गणित

बिजली बिल के गणित को समझना आम आदमी के लिए किसी पहेली से कम नहीं है। यदि आपकी खपत 300 यूनिट से ऊपर जाती है, तो आप पर ‘फिक्स चार्ज’ का बम फूटता है। 2 से 5 किलोवाट लोड वाले ग्राहकों को 50 रुपये और उससे ऊपर वालों को 75 रुपये प्रति किलोवाट के हिसाब से फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है। इसके अलावा, केंद्र सरकार के खाते में जाने वाली ‘इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी’ के नाम पर भी प्रति यूनिट 10 पैसे का चूना लग रहा है।

उपभोक्ता संगठनों का आरोप है कि सरकार और निगम मिलकर घुमा-फिराकर जनता पर टैक्स का बोझ डाल रहे हैं, जबकि बिजली आपूर्ति और सेवाओं के नाम पर ढांचा आज भी पुराना और जर्जर बना हुआ है।

विज्ञापन

चंडीगढ़ की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।