Haryana electricity strike: हरियाणा के बिजली महकमे में घमासान मच गया है। गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपे जाने के विरोध में राज्यभर के बिजली निगम के अधिकारी और कर्मचारी तीन दिन की हड़ताल पर उतर आए हैं। (haryana bijli karamchari hartal) ‘हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के इस ऐलान के बाद बुधवार रात 12 बजते ही सूबे के कई जिलों में अंधेरा छा गया। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि हड़ताल के इन तीन दिनों में किसी भी तरह के फॉल्ट को ठीक नहीं किया जाएगा, जिसका असर अब मैदानी इलाकों में साफ दिखने लगा है।
आधी रात से ठप हुई बिजली, घरों में छाया संकट
हड़ताल शुरू होते ही गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, पंचकूला, रोहतक और सोनीपत समेत आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बिजली आपूर्ति चरमरा गई। झज्जर, जींद, नारनौल और कुरुक्षेत्र के कई इलाकों में रात 11 बजे से ही ट्रांसफार्मर और फीडर ठप हो गए। लंबी कटौती के चलते घरों में लगे इनवर्टर भी जवाब दे गए। (gurugram nuh power strike) सुबह होते-होते स्थिति तब और विकट हो गई जब बिजली न होने के कारण पानी की मोटरें नहीं चल सकीं। टंकियां खाली रह गईं और लोगों को पीने के पानी के लिए भी जूझना पड़ा। त्योहारी सीजन के बीच बिजली गुल होने से बाजारों और आम परिवारों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
सरकार की वैकल्पिक तैयारी और प्रशासनिक सख्ती
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देर रात तक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। सरकार ने व्यवस्था को पटरी पर बनाए रखने के लिए कमर कस ली है। पटवारी और पुलिस कर्मियों को वैकल्पिक व्यवस्था में लगाया गया है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने पंचकूला मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे फील्ड में उतार दिया है।
अंबाला, कुरुक्षेत्र, रोहतक और पानीपत जैसे सर्किलों में सुपरिटेंडिंग इंजीनियर और एक्सईएन निगरानी रख रहे हैं। इसके साथ ही तमाम सब-स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कर्मचारियों की सभी तरह की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं।
कर्मचारियों की नाराजगी और मुख्यमंत्री की अपील
बिजली कर्मचारियों के इस भारी आक्रोश के पीछे महकमे में स्टाफ की भारी कमी भी एक बड़ा कारण है। आंकड़ों के मुताबिक, ऊर्जा विभाग में स्वीकृत 53,289 पदों में से करीब 48 प्रतिशत यानी 25,543 पद खाली पड़े हैं और काम का पूरा दारोमदार आउटसोर्स कर्मचारियों के कंधों पर है। ( nayab saini meeting electricity board) वहीं, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यूनियनों को आश्वस्त किया है कि सरकार ने कोई नया आवेदन नहीं मांगा था और इस फैसले के खिलाफ अपटेल (APTEL) में मजबूती से पैरवी की जाएगी।
सीएम ने यूनियनों को अपनी पसंद का वकील खड़ा करने की छूट देते हुए उसका खर्च उठाने का ऐलान किया है और त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।

