गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस देने पर बढ़ा विवाद
प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए एसबीसी यूनियन के महासचिव राजेश चंद्र सिरोही ने बताया कि करनाल में हुई राज्य स्तरीय बैठक के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि महज दो महीने पहले सरकार और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बीच वार्ता हुई थी। इसमें पैरेलल लाइसेंस रद्द करने, स्मार्ट मीटर प्रणाली पर रोक लगाने और एग्री डिस्कॉम का गठन न करने जैसी प्रमुख मांगों पर सहमति बनी थी, जिसके बाद यूनियन ने अपनी प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी थी। लेकिन सरकार ने वादे से मुकरते हुए गुरुग्राम और नूंह सर्कल में बिजली वितरण का पैरेलल लाइसेंस एक निजी कंपनी को सौंप दिया।
22 से 24 अक्टूबर तक प्रदेशभर में बिजली हड़ताल का आह्वान
मंच का संचालन कर रहे एचएसईबी वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव सतबीर देशवाल ने कहा कि सरकार की यह वादाखिलाफी सीधे तौर पर समझौते का सीधा उल्लंघन है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मोर्चे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए 22, 23 और 24 अक्टूबर को तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल की घोषणा कर दी है। इसके तहत बुधवार यानी 21 अक्टूबर को अंबाला सर्कल के सभी उप-मंडल (सब-डिवीजन) कार्यालयों पर सुबह गेट मीटिंग आयोजित की जाएगी और HERC द्वारा जारी निजीकरण आदेश की प्रतियां जलाई जाएंगी।
सर्व कर्मचारी संघ और रोडवेज यूनियनों ने भी दिया समर्थन
अंबाला सर्कल के इस विरोध प्रदर्शन में बिजली निगम के साथ-साथ अन्य कर्मचारी संगठनों का भी व्यापक समर्थन मिला। प्रदर्शन के दौरान सर्व कर्मचारी संघ की राज्य कमेटी से मलकीत सिंह, हरियाणा रोडवेज से बढ़ाना, एचएसईबी वर्कर यूनियन राज्य कमेटी से राजकुमार सेहला और ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन से सर्कल सचिव विकास व विनोद समेत तमाम इकाइयों के प्रधान, सचिव और कार्यकारिणी सदस्यों ने शिरकत की। कर्मचारी नेताओं ने सभी वर्ग के कर्मियों से एकजुट होकर आने वाली तीन दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।

