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Haryana Heatwave Alert: हीटवेव की चपेट से बचाने की कोशिश शुरू: जापान की मियावाली तकनीक से उगेंगे प्रदेश में जंगल

AAmandeep Singh
हीटवेव की चपेट  से बचाने की कोशिश शुरू: जापान की मियावाली तकनीक से उगेंगे प्रदेश में जंगल
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करनाल। प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है।  मौसम विभाग के अनुसार 21 से 23 अप्रैल के बीच हीटवेव का असर और तेज होगा, जबकि तापमान में 2 से 4 डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है, जो मंडियों में गेहूं बेचने के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई जगहों पर पीने के पानी और छाया की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ रही है।

आकृति संस्था के  अध्यक्ष अनुज सैनी ने कहा कि यह कलाइमेंट चेंज का असर है। इस बार गर्मी ज्यादा पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि यूं भी पौधे और पेड़ हमारी प्राथमिकता में ही नहीं है। इस वजह से शहर और गांवों में हरियाली का एरिया कम हो रहा है। 

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जापान की मियावाकी तकनीक से शहर में जंगल उगाए जाएंगे 

 दूसरी ओर सरकार ने वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए एक प्लान पर काम करना शुरू किया है। सीएम नायब सिंह सैनी ने करनाल दौरे के दौरान बताया कि  जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 298.4 करोड़ रुपये का ग्रीन प्लान मंजूर किया है, जिससे हरियाली बढ़ाने और गर्मी के असर को कम करने की कोशिश की जाएगी। ग्रीन प्लान के तहत राज्य में 20 लाख पौधे लगाए जाएंगे और 1,882 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण किया जाएगा। इसके अलावा 4,518 हेक्टेयर में पुराने पौधों की देखभाल कर उनकी जीवित रहने की दर बढ़ाई जाएगी।

शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और गर्मी को कम करने के लिए मियावाकी  तकनीक से घने जंगल विकसित किए जाएंगे। वहीं, अरावली और शिवालिक क्षेत्रों में 33 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण, मिट्टी सुधार और खराब भूमि को पुनर्जीवित करने के कार्य किए जाएंगे। सरकार ने ‘हरितिमा: हरियाली का रंग, हरियाणा के संग’ अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत स्कूलों के छात्रों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाएगा और 70 इको-कैंप आयोजित किए जाएंगे।

मियावाकी तकनीक क्या है? 

जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावकी ने इस तकनीक को  विकसित किया।  तकनीक आज दुनियाभर में तेजी से जंगल उगाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। भारत में भी यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस तकनीक में स्थानीय (देसी) पौधों को बहुत घनी संख्या में एक छोटे क्षेत्र में लगाया जाता है। खास बात यह है कि मिट्टी को पहले से पोषक तत्वों से समृद्ध बनाया जाता है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं।

कैसे काम करती है?

एक ही जगह पर कई तरह के देसी पेड़-पौधे लगाए जाते हैं , पौधों के बीच दूरी बहुत कम रखी जाती है, शुरुआती 2–3 साल तक नियमित देखभाल की जाती है, इसके बाद जंगल अपने आप विकसित होने लगता है 

क्या हैं फायदे?

सामान्य जंगल की तुलना में 10 गुना तेजी से विकास , कम जगह में ज्यादा हरियाली, वायु प्रदूषण कम करने में मदद, पक्षियों और जीवों के लिए नया आवास, भारत में उपयोग दिल्ली मुंबई और बेंगलूर जैसे बड़े शहरों में मियावाकी जंगल बनाए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण सुधार में मदद मिल रही है।

 हीटवेव अलर्ट

कई जिलों में तापमान 40°C पार 

21–23 अप्रैल तक लू चलने की चेताव

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