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Ayushman Bharat Haryana: आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए राहत: हरियाणा में नहीं रुकेगा मुफ्त इलाज, IMA ने वापस ली हड़ताल

GGaganpreet Kaur
आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए राहत: हरियाणा में नहीं रुकेगा मुफ्त इलाज, IMA ने वापस ली हड़ताल
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हरियाणा के लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए शुक्रवार को राहत की एक बड़ी खबर आई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत आने वाले मरीजों का इलाज न करने के अपने कड़े फैसले को वापस ले लिया है। आईएमए और हरियाणा हेल्थ प्रोटेक्शन अथॉरिटी (एचएचपीए) के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद आखिरकार गतिरोध टूट गया। अगर यह हड़ताल होती, तो प्रदेश के सैकड़ों निजी अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए मुफ्त इलाज के दरवाजे बंद हो जाते।

सीईओ सतबीर मान के साथ बैठक में बनी बात

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दरअसल, निजी अस्पताल लंबे समय से क्लेम पास होने में हो रही देरी और प्रशासनिक अड़चनों से परेशान थे। गतिरोध को सुलझाने के लिए हरियाणा हेल्थ प्रोटेक्शन अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सतबीर मान ने आईएमए के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में डॉक्टरों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया। सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया कि अस्पतालों के पुराने लंबित भुगतानों का निपटारा जल्द से जल्द कर दिया जाएगा और क्लेम सेटलमेंट की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा।

बेवजह पैसों की कटौती पर लगेगा अंकुश

निजी अस्पतालों की सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि बीमा कंपनियां और सरकारी अमला बिना किसी ठोस कारण के उनके क्लेम में भारी कटौती कर देता था। बैठक में तय हुआ है कि अब बिना उचित कारण के कोई कटौती नहीं की जाएगी। अगर कहीं कटौती की भी जाती है, तो संबंधित अस्पताल को उसका स्पष्ट और तार्किक कारण बताना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, सूचीबद्ध निजी अस्पतालों की रोजमर्रा की समस्याओं को सुनने और उनके तुरंत समाधान के लिए एक रेगुलर संवाद तंत्र (कम्युनिकेशन सिस्टम) भी तैयार किया जाएगा।

आईएमए ने डॉक्टरों को भी दी नसीहत

समझौते के बाद आईएमए ने भी अपने रुख में नरमी दिखाई है। एसोसिएशन ने राज्य के अपने सभी सदस्य निजी अस्पतालों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे केवल अधिकारों की बात न करें, बल्कि अपनी जिम्मेदारी भी निभाएं। आईएमए ने डॉक्टरों से कहा है कि जब भी सरकारी आयुष्मान टीम की तरफ से किसी क्लेम या दस्तावेज को लेकर कोई आपत्ति (क्वेरी) उठाई जाए, तो अस्पताल प्रबंधन उसका तय समय के भीतर जवाब दे, ताकि भुगतान की प्रक्रिया में खुद की तरफ से कोई देरी न हो।

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