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हरियाणा में जमीन पैमाइश अब डिजिटल, GNSS मशीन से होगा माप

AAmit Gupta
हरियाणा में जमीन पैमाइश अब डिजिटल, GNSS मशीन से होगा माप
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चंडीगढ़ से मिली जानकारी के मुताबिक नायब सिंह सैनी सरकार ने जमीन की पैमाइश को पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लिया है। अब प्रदेश में पैमाइश के लिए GNSS रोवर मशीन का इस्तेमाल अनिवार्य होगा और ऑफलाइन प्रक्रिया बंद कर दी गई है।

गुरुग्राम, हिसार, करनाल और रोहतक जैसे जिलों में जमीन विवाद और सीमांकन को लेकर लंबे समय से शिकायतें आती रही हैं। नए सिस्टम से इन मामलों में तेजी आने की उम्मीद है।

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ऑनलाइन आवेदन से ही होगी पैमाइश

राजस्व विभाग ने साफ किया है कि अब पैमाइश के लिए लोगों को ई-जीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पटवारियों को रोवर मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है और हर तहसील में मशीन से माप अनिवार्य की जा रही है।

हिसार जिले में 6 तहसील और 3 उप-तहसील के लिए 17 GNSS रोवर मशीनें दी गई हैं। हालांकि अभी तक कई जगहों पर पैमाइश शुरू नहीं हो सकी है, जबकि 120 से ज्यादा लोग आवेदन कर चुके हैं।

सैटेलाइट से जुड़ी मशीन, बेहद सटीक माप

GNSS रोवर मशीन सीधे सैटेलाइट से सिग्नल लेती है और हरियाणा के CORS नेटवर्क से जुड़ी होती है। इससे जमीन की सटीक लोकेशन अक्षांश और देशांतर के आधार पर तय होती है।

मशीन में संबंधित गांव का डिजिटल नक्शा लोड किया जाता है और माप की सटीकता 1-2 सेंटीमीटर तक होती है। यह डेटा सीधे राजस्व विभाग के सर्वर पर अपलोड होता है, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो जाती है।

फीस स्ट्रक्चर भी तय, जानें कितना खर्च

सरकार ने पैमाइश के लिए अलग-अलग कैटेगरी में फीस तय की है। ग्रामीण कृषि भूमि के लिए पहले एक एकड़ पर 1000 रुपए और अतिरिक्त प्रति एकड़ 500 रुपए शुल्क लिया जाएगा, साथ में 500 रुपए कमीशन लगेगा।

गैर-कृषि जमीन जैसे फार्म हाउस के लिए पहले एक एकड़ पर 2000 रुपए और अतिरिक्त प्रति एकड़ 500 रुपए तय किए गए हैं। शहरी क्षेत्र में 500 वर्ग गज तक 2000 रुपए और उससे अधिक पर 3000 रुपए शुल्क लगेगा, साथ में 1000 रुपए स्थानीय कमीशन देना होगा।

डिजिटल पैमाइश से जमीन से जुड़े विवाद कम होने की उम्मीद है। पहले मैन्युअल माप में गलती और विवाद की शिकायतें ज्यादा आती थीं, जिससे केस लंबे समय तक फंसे रहते थे।

अब सटीक माप और ऑनलाइन रिकॉर्ड से किसानों, प्रॉपर्टी मालिकों और खरीदारों को सीधा फायदा मिलेगा। जमीन खरीद-फरोख्त और सीमांकन की प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और भरोसेमंद होगी।

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