Haryana Liquor Smuggling Uttarakhand: देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के शिक्षण संस्थानों में नशे की जड़ें किस कदर गहरी हो चुकी हैं, इसका सनसनीखेज खुलासा आबकारी विभाग की ताजा कार्रवाई में हुआ है। (Garvit Alias Vikrant Dehradun) उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से एलएलबी (LLB) की पढ़ाई कर रहे 25 वर्षीय छात्र गर्वित उर्फ विक्रांत ने अपनी पढ़ाई और कैफे के धंधे की आड़ में अवैध शराब की तस्करी का एक ऐसा नेटवर्क खड़ा कर दिया, जिसने पुलिस और आबकारी विभाग के भी होश उड़ा दिए।
हरियाणा और चंडीगढ़ से सस्ती व इंपोर्टेड शराब लाकर देहरादून के बिधौली और प्रेमनगर स्थित हॉस्टलों व (Uttranchal University Liquor Racket) पीजी में सप्लाई करने वाले इस रैकेट से उत्तराखंड सरकार को सालाना 5 से 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। इस पूरे मामले में गर्वित, उसकी मां और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
2022 में रखी नेटवर्क की नींव, पढ़ाई की आड़ में शुरू हुआ काला कारोबार
मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला गर्वित साल 2022 में लॉ की पढ़ाई करने देहरादून आया था। पढ़ाई के दौरान ही उसने देखा कि बिधौली क्षेत्र में हजारों छात्र-छात्राएं हॉस्टलों और पीजी (PG) में रहते हैं। उसने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से सस्ती व प्रीमियम ब्रांडेड शराब लाकर इन छात्रों को सप्लाई करना शुरू किया।
धंधा चमकता देख गर्वित ने अपने पूरे परिवार को देहरादून शिफ्ट कर लिया और बिधौली क्षेत्र में तीन कैफे खोल लिए। कैफे केवल एक पर्दा थे, असली खेल तो इनके पीछे से शराब की तस्करी का चल रहा था।
वॉट्सऐप ग्रुप, पैम्फलेट और 15 हजार की सैलरी: ऐसे चलता था ‘कॉर्पोरेट’ मॉडल
तस्करी के इस खेल को पेशेवर अंदाज में चलाने के लिए गर्वित ने बाकायदा एक ‘बिजनेस मॉडल’ तैयार किया। उसने आसपास के 18 से 25 साल के कॉलेज छात्रों व युवाओं को ही इस काम में जोड़ लिया। 15 हजार रुपये प्रति माह की सैलरी और टू-व्हीलर (स्कूटी) देकर उन्हें डिलीवरी बॉय बनाया गया।
हॉस्टलों और पीजी में बाकायदा पैम्फलेट बांटे जाते थे, जिनमें शराब की दरें लिखी होती थीं। ऑर्डर लेने के लिए एक विशेष वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था। ग्रुप में डिलीवरी बॉय को सुबह-शाम हाजिरी के तौर पर अपनी फोटो (सेल्फी) डालनी होती थी। (Bidholi Premnagar Hostel Liquor) इसी ग्रुप पर डिलीवरी लोकेशन और पैसों के डिजिटल लेनदेन का पूरा हिसाब-किताब तय होता था। कैफे के खाने के पार्सल के साथ रातभर शराब की होम डिलीवरी धड़ल्ले से की जा रही थी।
आबकारी विभाग की छापेमारी और मां की गिरफ्तारी
आबकारी निरीक्षक मसूरी क्षेत्र दिवाकर चौधरी ने बताया कि 25 अगस्त की रात आबकारी टीम ने बिधौली क्षेत्र में एक कार और दो स्कूटियों को जब्त कर दो तस्करों को दबोचा था। सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने पूरी कहानी उगल दी और बताया कि इस पूरे गिरोह का सरगना 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट गर्वित है।
तस्करों की निशानदेही पर जब आबकारी टीम ने एक मकान पर छापा मारा, तो वहां से शराब का जखीरा बरामद हुआ। मौके से गर्वित की मां को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि गर्वित खुद फरार हो गया।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, आखिरकार सीजेएम कोर्ट में सरेंडर
मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी विभाग ने गर्वित पर आबकारी अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं (63/72) में मामला दर्ज किया। खुद को घिरता देख गर्वित ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे कोई राहत नहीं दी।
चारों तरफ से शिकंजा कसने और पुलिस की लगातार दबिश के बाद आरोपी गर्वित उर्फ विक्रांत ने सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
तड़के छापेमारी में साथी आदित्य दबोचा गया, 10 पेटी शराब बरामद
मास्टरमाइंड गर्वित के सरेंडर के बाद भी आबकारी विभाग ने इस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ना जारी रखा। आबकारी टीम ने नेटवर्क से जुड़े दूसरे अहम सदस्य आदित्य कुमार के बिधौली स्थित किराये के कमरे पर अलसुबह छापा मारा।
छापेमारी के दौरान कमरे से करीब 10 पेटी महंगी और इंपोर्टेड शराब बरामद हुई। आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी के मुताबिक कई बोतलों पर आबकारी विभाग का प्रामाणिक होलोग्राम तक नहीं था। टीम ने शराब जब्त कर आदित्य को गिरफ्तार कर लिया है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि हरियाणा व चंडीगढ़ से इतनी बड़ी मात्रा में बिना होलोग्राम वाली शराब की खेप राज्य की सीमाओं को पार कर देहरादून तक कैसे पहुंच रही थी।
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