Haryana News: हरियाणा की मंडियों में धान की सरकारी खरीद पर संकट, 500 करोड़ का बकाया न मिलने से भड़के राइस मिलर्स
हरियाणा की मंडियों में धान की सरकारी खरीद पर संकट, 500 करोड़ का बकाया न मिलने से भड़के राइस मिलर्स
Haryana News: हरियाणा की अनाज मंडियों में खरीफ सीजन के धान की आवक भले ही जोर पकड़ने लगी हो, लेकिन सरकारी खरीद और उसके बाद फसल के उठान पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। (Haryana Rice Millers Association Strike) इस बार वजह सिर्फ मौसम या नमी नहीं, बल्कि सरकार और राइस मिलर्स के बीच गहराता बकाया भुगतान का विवाद है। प्रदेश के करीब 1400 राइस मिलरों में से अब तक महज 215 का ही रजिस्ट्रेशन पूरा हो पाया है, जिससे मंडियों से धान का उठान बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
500 करोड़ का बकाया अटका, मिलर्स ने अपनाया ‘नो रजिस्ट्रेशन’ रुख
विवाद की सबसे बड़ी वजह दो सालों से अटका हुआ 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान है। मिलर्स कस्टम मिल्ड राइस (CMR Rice Milling Dues HAFED) का काम खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, स्टेट वेयरहाउस और हैफेड के लिए करते हैं। हालांकि खाद्य आपूर्ति विभाग अपना कोई बकाया न होने का दावा कर रहा है, लेकिन स्टेट वेयरहाउस और हैफेड के पास मिलिंग, अनलोडिंग, स्टेकिंग और दो साल का बोनस मिलाकर करीब 500 करोड़ रुपये फंसा हुआ है।
इसी बकाया राशि के विरोध में मिलर्स ने ‘नो रजिस्ट्रेशन और नो एग्रीमेंट’ का कड़ा रुख अपना लिया है। अकेले यमुनानगर जिले की बात करें तो 185 मिलर्स का करीब 100 करोड़ रुपये बकाया है। मिलर्स का साफ कहना है कि जब तक पिछला हिसाब चुकता नहीं होता और प्रक्रिया आसान नहीं की जाती, वे आगे काम बढ़ाने के मूड में नहीं हैं।
मंडियों में धान का ढेर, पर नमी और रजिस्ट्रेशन के फेर में फंसी खरीद
उठान अटकने का असर प्रदेश भर की प्रमुख मंडियों में साफ देखा जा सकता है। यमुनानगर, कैथल, जींद, करनाल, फतेहाबाद और सिरसा की मंडियों में अब तक लगभग 1.95 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कैथल में पहुंचे 50 हजार क्विंटल धान में से महज 427 एमटी और जींद के उचाना में सिर्फ 80 क्विंटल की ही खरीद दर्ज हो सकी है।
खरीद न होने के पीछे दूसरी बड़ी वजह धान में नमी का तय सीमा (17%) से काफी अधिक होना है। फतेहाबाद और कैथल की मंडियों में धान में 22 से 24 प्रतिशत तक नमी पाई जा रही है। फतेहाबाद के डीसी डॉ. विवेक भारती ने रतिया और भूना मंडियों का दौरा कर हालात का जायजा लिया, लेकिन किसान सूखी फसल न लाने के कारण मजबूरी में इंतजार कर रहे हैं।
एसोसिएशन ने रखी शर्तें: पारदर्शिता और बोनस जारी करने की मांग
राइस मिलर्स एवं डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि वर्ष 2024-25 का लंबित बोनस तुरंत जारी किया जाए और आगामी सीजन के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस तय हो।
इसके अलावा, भारतीय खाद्य निगम (FCI) में पर्याप्त भंडारण की जगह मुहैया कराने और मंडियों में धान की नमी, (Haryana Mandi News 2026) ब्रोकन और डिसकलर की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ करने की शर्त रखी गई है। जब तक इन मांगों पर कोई ठोस सहमति नहीं बनती, मंडियों में धान के उठान का यह पेंच सुलझता नहीं दिख रहा।
यह भी पढ़ें– Haryana Milk Strike: हरियाणा में दूध की सप्लाई बंद! 100 रुपये प्रति लीटर की मांग पर अड़े किसान
