Haryana News: हरियाणा की सड़कों और गलियों की सूरत सुधारने और यातायात को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में नायब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से सड़कों के किनारे बेकार खड़े अनुपयोगी बिजली के खंभों को हटाने का काम अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की हालिया उच्चस्तरीय बैठक में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बाद बिजली वितरण निगमों ने इस अभियान में पूरी ताकत झोंक दी है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य भर में चिन्हित कुल 6,443 अप्रयुक्त खंभों में से 4,222 खंभों को जमीन से उखाड़कर हटाया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 65.5 प्रतिशत हिस्सा है। सरकार ने बाकी बचे 2,221 खंभों को भी हटाने के लिए इस साल के अंत यानी 31 दिसंबर तक की समय-सीमा तय की है।
उत्तरी हरियाणा में तेजी, दक्षिण में अभी भी बहुत काम बाकी
बिजली निगमों द्वारा जारी सर्कलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों निगमों के कामकाज में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने अपने अधिकार क्षेत्र में असाधारण तेजी दिखाते हुए चिन्हित 3,651 खंभों में से 3,333 खंभों को सफलतापर्वक हटा दिया है।
इसके साथ ही UHBVN ने लगभग 91.3 प्रतिशत की शानदार निकासी दर हासिल कर ली है, और इसके कई सर्किलों में यह काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके विपरीत, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के अंतर्गत आने वाले इलाकों में यह रफ्तार थोड़ी धीमी रही है। DHBVN ने चिन्हित 2,792 खंभों में से अब तक 889 खंभे यानी करीब 31.8 प्रतिशत ही हटाए हैं, जिसके चलते 1,903 खंभे हटाने अभी शेष हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो राज्य भर में लंबित पड़े 2,221 खंभों में से 86 प्रतिशत हिस्सा दक्षिणी हरियाणा का ही है।
रेवाड़ी बना सबसे बड़ा लंबित क्षेत्र, कई जिलों में काम पूरा
DHBVN के कार्यक्षेत्र में आने वाला रेवाड़ी जिला इस अभियान के सबसे बड़े लंबित क्षेत्र के रूप में सामने आया है। अकेले रेवाड़ी में ही 1,131 खंभे हटाए जाने का इंतजार कर रहे हैं, जिनमें 11 केवी लाइनों के 795 और 33 केवी लाइनों से जुड़े 336 खंभे शामिल हैं। इसके अलावा फतेहाबाद में 301, नारनौल में 247 और भिवानी में 142 खंभे अभी भी रास्ते की रुकावट बने हुए हैं। दूसरी तरफ, राहत की बात यह है कि फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम-2 और सिरसा सर्किलों में यह सफाई अभियान पूरी तरह संपन्न हो चुका है।
इसी तरह UHBVN के कार्यक्षेत्र में आने वाले अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों में भी सभी अप्रयुक्त खंभे हटाए जा चुके हैं। रोहतक और करनाल में कुछ चिन्हित खंभों को भविष्य की औद्योगिक व कम वोल्टेज लाइनों की जरूरतों के मद्देनजर सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है। बिजली वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि मैदानी स्तर के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे बचे हुए कामों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें ताकि तय डेडलाइन से पहले सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित और बाधा-मुक्त बनाया जा सके।
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