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Panchkula Forest Scam: वन विभाग का अजब न्याय: 10,000 पेड़ चोरी होने की पोल खोलने वाले रक्षक को मिली सजा

AAmandeep Singh
वन विभाग का अजब न्याय: 10,000 पेड़ चोरी होने की पोल खोलने वाले रक्षक को मिली सजा
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पंचकूला | हरियाणा के वन विभाग में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने रक्षक और भक्षक के बीच की लकीर को धुंधला कर दिया है। पंचकूला के खैर जंगलों में तस्करों ने बेहद शातिराना अंदाज में 10,000 से अधिक पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। इस ‘ग्रीन स्कैम’ की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पकड़े जाने के डर से चोरों ने आवाज न करने वाले ‘साइलेंट कटर’ और परिवहन के लिए ऊंटों का सहारा लिया, ताकि गाड़ियों के टायरों के निशान न बनें और जंगल की शांति भी भंग न हो।

सच बोलने की मिली सजा: धरने पर बैठा ‘जंगल का सिपाही’

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इस पूरे गोरखधंधे की जानकारी फॉरेस्ट गार्ड विजय कुमार को लगी, जिन्होंने बिना डरे इसकी शिकायत सीधे हरियाणा के वन मंत्री से कर दी। विजय को उम्मीद थी कि इस खुलासे के बाद दोषियों पर गाज गिरेगी, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। विभाग ने जांच करने के बजाय शिकायतकर्ता विजय कुमार को ही सस्पेंड कर दिया। अब विजय कुमार अपनी वर्दी के सम्मान और पेड़ों को इंसाफ दिलाने के लिए अकेले धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मेरे पिता भी फॉरेस्ट गार्ड थे। इन पेड़ों को कटते देखना ऐसा है जैसे मेरे परिवार के किसी सदस्य को मुझसे छीन लिया गया हो।”

साइलेंट कटर और ऊंटों का शातिर गठजोड़

खैर की लकड़ी अपनी औषधीय गुणवत्ता और बाजार में ऊंचे दामों के लिए जानी जाती है। तस्करों ने इस महा-घोटाले को अंजाम देने के लिए पुख्ता प्लानिंग की थी। कटाई के बाद सबूत मिटाने के लिए पेड़ों के ठूंठों को जला दिया गया ताकि उनकी गिनती न हो सके। जानकार मानते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई स्थानीय मिलीभगत के बिना मुमकिन नहीं है। ऊंटों का इस्तेमाल रेतीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर बिना आवाज के लकड़ी ढोने के लिए किया गया, जो तस्करों की गहरी पैठ को दर्शाता है।

रेगिस्तान बनने की ओर बढ़ता हरियाणा?

यह घटना हरियाणा के पर्यावरण के लिहाज से बेहद डरावनी है। आंकड़ों की मानें तो पूरे राज्य में सिर्फ 3.25% वन क्षेत्र बचा है। ऐसे में 10,000 पेड़ों का एक साथ साफ हो जाना किसी त्रासदी से कम नहीं है। सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल होते ही लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। जनता सवाल पूछ रही है कि अगर शिकायत करने वाले कर्मचारियों को ही निशाना बनाया जाएगा, तो भविष्य में कौन अधिकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएगा? लोगों का डर है कि यदि इसी रफ्तार से सिस्टम की शह पर पेड़ कटते रहे, तो हरियाणा को रेगिस्तान बनने में देर नहीं लगेगी।

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