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Meham SHO Suspended: रोहतक में बड़ी कार्रवाई: फसल चोरी मामले में ढिलाई पर महम SHO और हवलदार सस्पेंड

AAmandeep Singh
रोहतक में बड़ी कार्रवाई: फसल चोरी मामले में ढिलाई पर महम SHO और हवलदार सस्पेंड
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रोहतक। हरियाणा पुलिस में भ्रष्टाचार और काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सरकार और प्रशासन ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। ताजा मामला रोहतक के महम थाने का है, जहां एक गरीब किसान को न्याय दिलाने के बजाय आरोपी का साथ देने पर थाना प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार और हवलदार नरेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। एसपी गौरव राजपुरोहित के इस कड़े फैसले से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

सवा एकड़ की फसल हुई ‘साफ’, थाने में नहीं हुई सुनवाई

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मामले की शुरुआत महम के गांव फरमाणा खास से हुई। यहां के किसान शशि ने अपनी सवा एकड़ जमीन पर खून-पसीना एक कर गेहूं की फसल उगाई थी। आरोप है कि गांव के ही एक रसूखदार युवक दीपक ने रात के अंधेरे में खेत से सारी कटी हुई फसल पार कर दी। पीड़ित किसान जब न्याय की गुहार लेकर महम थाने पहुंचा, तो वहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। आरोप है कि दीपक के रसूख और ऊंचे संपर्कों के दबाव में आकर एसएचओ और जांच अधिकारी ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया और कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।

सीएम विंडो से चला हंटर, तो आनन-फानन में दर्ज किया केस

पुलिस के चक्कर काटकर थके किसान ने हार नहीं मानी और मामले की शिकायत मुख्यमंत्री के ऑनलाइन पोर्टल ‘सीएम विंडो’ पर दर्ज करा दी। मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश मिलते ही रोहतक एसपी ने मामले की गहन जांच करवाई। जैसे ही पुलिस को भनक लगी कि ऊपर से डंडा चला है, महम थाना पुलिस ने आनन-फानन में बीती 30 अप्रैल को आरोपी दीपक के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

जांच में खुली पोल: लापरवाही पड़ी भारी

एसपी गौरव राजपुरोहित द्वारा करवाई गई विभागीय जांच में यह स्पष्ट हो गया कि महम थाना प्रभारी और हवलदार ने जानबूझकर मामले में देरी की और कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरती। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो किसान का नुकसान कम हो सकता था और आरोपी पर शिकंजा कसा जा सकता था। इसी लापरवाही को आधार मानते हुए एसपी ने दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश है जो रसूखदारों के दबाव में आकर आम जनता की शिकायतों को अनसुना कर देते हैं।

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