Haryana Weather: हरियाणा में मानसून एक बार फिर अपने तेवर दिखाने को तैयार है। बीते कुछ दिनों की सुस्ती के बाद आज से प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय हुए मजबूत चक्रवातीय सर्कुलेशन (Cyclonic Circulation) और मानसूनी ट्रफ रेखा के हिमालय की पहाड़ियों से मैदानी इलाकों की ओर खिसकने के कारण राज्य में झमाझम बारिश के आसार बन रहे हैं।
मौसम विभाग ने उत्तरी हरियाणा के तीन जिलों—पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में भारी बारिश की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।
अगले 3 दिन कैसा रहेगा बारिश का मिजाज?
मानसून की यह हलचल आगामी दिनों में और तेज होने वाली है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो 3 सितंबर से मानसूनी गतिविधियां जोर पकड़ेंगी।
3 सितंबर: उत्तरी व पूर्वी हरियाणा के जिलों—पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद में यलो अलर्ट रहेगा। इन इलाकों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
4 सितंबर: बारिश का दायरा बढ़ेगा और प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी-खासी बारिश होने की उम्मीद है। उत्तरी-पूर्वी जिलों में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
5 सितंबर: मानसून पूरे उफान पर रहेगा। दक्षिण-पूर्वी और उत्तरी हरियाणा के लगभग 10 से 12 जिलों में तेज से भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
किसानों के लिए एडवाइजरी: खेतों में अभी न डालें खाद-दवाएं
लगातार होने वाली बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग ने किसानों के लिए जरूरी अलर्ट जारी किया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले 3-4 दिनों तक फसलों में सिंचाई बिल्कुल न करें।
हवा में नमी का स्तर ज्यादा रहने के कारण इस मौसम में फसलों पर कीटों का हमला बढ़ सकता है। खासकर कपास की फसल में सफेद मक्खी और धान की फसल में जड़ सुंडी लगने की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम पूरी तरह साफ होने के बाद ही किसी रसायन या कीटनाशक का छिड़काव करें, वरना दवा का असर बह जाएगा।
अगस्त ने कराया इंतजार: 3 साल में सबसे कम बरसा मानसून
चालू मानसून सीजन के तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अगस्त के आंकड़े कुछ खास राहत देने वाले नहीं रहे। इस साल अगस्त महीने में प्रदेश भर में सामान्य 146.1 मिमी बारिश की तुलना में महज 135.4 मिमी बारिश ही दर्ज की गई। यह आंकड़ा बीते 3 वर्षों में अगस्त महीने की सबसे कम बारिश का है। 1 जून से 31 अगस्त के कुल आंकड़ों को देखें तो प्रदेश में अब तक 283.4 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य (349.9 मिमी) से काफी कम है।
अगर जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के दक्षिण और पश्चिमी हिस्सों में मानसून मेहरबान रहा है। भिवानी में सामान्य से (+41%), पलवल में (+26%), नूंह में (+25%), गुरुग्राम में (+17%) और फरीदाबाद में (+7%) अधिक पानी बरसा है। वहीं दूसरी ओर जीटी रोड बेल्ट और मध्य हरियाणा के जिले बूंद-बूंद को तरसते दिखे। करनाल में सामान्य से (-68%), जींद में (-51%), कैथल में (-49%), अंबाला में (-37%) और रोहतक में (-19%) भारी कमी दर्ज की गई है।
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