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Haryana Women Commission: बादशाह के 'टटीरी' के बाद 'सरकी चुनर' पर बवाल, हरियाणा महिला आयोग ने सेंसर बोर्ड को घेरा

AAmandeep Singh
बादशाह के 'टटीरी' के बाद 'सरकी चुनर' पर बवाल, हरियाणा महिला आयोग ने सेंसर बोर्ड को घेरा
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पंचकूला। पंचकूला स्थित हरियाणा राज्य महिला आयोग के दफ्तर से बॉलीवुड और संगीत जगत के लिए एक सख्त संदेश जारी हुआ है। पिछले कुछ समय से रैपर बादशाह के गाने ‘टटीरी’ को लेकर छिड़ा विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब ‘सरकी चुनर’ गाने ने आग में घी डालने का काम कर दिया है।

हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने इस मामले में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को पत्र भेजा है। आयोग का मानना है कि इस तरह के गानों के बोल न केवल समाज में गलत संदेश दे रहे हैं, बल्कि महिलाओं की गरिमा को भी ठेस पहुँचा रहे हैं।

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“पैसे और शोहरत के लिए संस्कृति से समझौता बर्दाश्त नहीं”

इस पूरे विवाद पर मीडिया से मुखातिब होते हुए रेनू भाटिया ने बॉलीवुड के मौजूदा ढर्रे पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक दौर था जब कभी-कभार कोई गाना अपनी बोल्डनेस की वजह से चर्चा में आता था, लेकिन अब तो जैसे अश्लीलता का सैलाब आ गया है। भाटिया के मुताबिक, चाहे बड़े स्टार हों या छोटे कलाकार, आज हर कोई रातों-रात अमीर और मशहूर होने की अंधी दौड़ में शामिल है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि पॉपुलर होने की इस चाहत में लोग अपनी ही गौरवशाली संस्कृति की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ‘सरकी चुनर’ जैसे गानों के जरिए जो भाषा परोसी जा रही है, वह पारिवारिक परिवेश के लिए घातक है।

सेंसर बोर्ड की भूमिका पर सवाल और भविष्य की रणनीति

महिला आयोग ने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसे गानों को बिना किसी काट-छांट के प्रसारित करने की अनुमति कैसे मिल जाती है? आयोग ने मांग की है कि भविष्य में गानों के लिरिक्स और फिल्मांकन को लेकर कड़े मानक तय किए जाएं। रेणु भाटिया ने चेतावनी दी है कि यदि बॉलीवुड ने अपनी दिशा नहीं बदली, तो आयोग कानूनी रूप से और भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस मामले ने एक बार फिर से अभिव्यक्ति की आजादी और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच की बहस को छेड़ दिया है।

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