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Hot Food Health Risk: गरमा-गरम खाने के शौकीन सावधान! डॉक्टरों ने जारी की बड़ी चेतावनी

AAmandeep Singh
Hot Food Health Risk: गरमा-गरम खाने के शौकीन सावधान! डॉक्टरों ने जारी की बड़ी चेतावनी
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स्वास्थ्य। भारत में कड़ाही से छनकर निकलते समोसे, खौलती हुई चाय या गरम-गरम मोमोज और सूप का लुत्फ उठाना आम बात है। अक्सर लोग तेज भूख या स्वाद के चक्कर में खाने को बिना ठंडा किए सीधे निगल जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस आदत को लेकर देशवासियों को एक बड़ी चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि जीभ को सुहाने वाला यह स्वाद आपके पूरे पाचन तंत्र और विशेषकर भोजन नली (Esophagus) के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

सीने में उठी तेज जलन, दबाने के लिए पिया ठंडा पानी तो और बिगड़ा खेल

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अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही कोई खौलता हुआ निवाला गले से नीचे उतरता है, तो छाती के बीचों-बीच असहनीय जलन और दर्द का अहसास होता है। उस वक्त स्थिति को संभालने के लिए लोग तुरंत फ्रिज का ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक गटक लेते हैं। मेडिकल साइंस के मुताबिक, यह तरीका सबसे ज्यादा खतरनाक है। तापमान का यह अचानक होने वाला उतार-चढ़ाव अंदरूनी त्वचा को ‘थर्मल शॉक’ देता है। इससे भोजन नली के भीतर छाले पड़ जाते हैं, जो धीरे-धीरे गहरे अल्सर (घाव) में तब्दील हो जाते हैं। इसके बाद पानी का एक घूंट निगलना भी दूभर हो जाता है।

झुलस जाती है अंदरूनी नली, एंडोस्कोपी में खुलती है पोल

अस्पतालों के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (पेट रोग) विभागों में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां मरीज सीने में तेज दर्द और खाना न निगल पाने की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। जब ऐसे मरीजों की एंडोस्कोपी (Internal Examination) की जाती है, तो डॉक्टर भी हैरान रह जाते हैं। इंसानी शरीर में भोजन नली अमूमन 25 से 30 सेंटीमीटर लंबी होती है। अत्यधिक गर्म खाना खाने से इस नली का एक बड़ा हिस्सा अंदर से पूरी तरह झुलस जाता है। सही समय पर इलाज न मिलने पर यह घाव पूरे गले को संक्रमित कर सकता है।

जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और क्यों खतरनाक है यह आदत?

देश के वरिष्ठ डॉक्टरों ने आम लोगों के लिए एक जरूरी मेडिकल एडवाइजरी साझा की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इंसानी ग्रासनली बेहद संवेदनशील ऊतकों (Tissues) से बनी होती है, जो अधिकतम 50 से 60 डिग्री सेल्सियस तक का ही तापमान बर्दाश्त कर सकती है। इसके उलट, जब कोई चीज उबलते तेल या सूप से सीधे निकाली जाती है, तो उसका तापमान 80 से 90 डिग्री सेल्सियस के पार होता है।

लगातार बहुत गर्म चीजें खाने से ग्रासनली की अंदरूनी परत बार-बार डैमेज होती है और खुद को रिपेयर करती है। कोशिकाओं (Cells) के बार-बार इस तरह डैमेज होने और बदलने की प्रक्रिया में जेनेटिक बदलाव होने का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर फूड पाइप के कैंसर (Esophageal Cancer) की मुख्य वजह बन सकता है। इसलिए सेहतमंद रहने का सीधा नियम है कि खाने को पहले थाली या कटोरी में थोड़ा ठंडा होने दें, उसके बाद ही उसका सेवन करें।

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