Health workers protest: पंचकूला में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने की हड़ताल
पंचकूला में स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल
Health workers protest: हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों को भरने और ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने से पहले कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने की मांग तेज हो गई है। मंगलवार को फार्मासिस्ट और एमपीएचडब्ल्यू एसोसिएशन ने पंचकूला स्थित स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय के बाहर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। दोनों संगठनों के बैनर तले जुटे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में पहले से ही बड़ी संख्या में पद खाली हैं। ऐसे में ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव शुरू करने के बजाय सरकार को पहले स्थायी भर्ती करनी चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
खाली पदों के बीच ट्रांसफर ड्राइव का विरोध
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण मौजूदा स्टाफ पर काम का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने से पहले रिक्त पदों को भरना जरूरी है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पदों का रेशनलाइजेशन करने के नाम पर स्वीकृत पदों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। एमपीएचडब्ल्यू एसोसिएशन की प्रधान शर्मिला ने कहा कि रेशनलाइजेशन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना होना चाहिए, न कि कर्मचारियों के कैडर को छोटा करना। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य विभाग में करीब 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। इसके चलते मौजूदा कर्मचारियों को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। शर्मिला के मुताबिक, सरकार को सबसे पहले खाली पदों पर नई भर्तियां करनी चाहिए। इसके बाद ही ऑनलाइन ट्रांसफर नीति लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए। कर्मचारियों की मांग है कि विभाग उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नीति पर दोबारा विचार करे।
फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष जगदीप ओहल्याण ने कहा कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के करीब 60 प्रतिशत पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट का काम तकनीकी प्रकृति का है और इसे कोई अन्य कर्मचारी नहीं संभाल सकता। ओहल्याण ने आरोप लगाया कि रिक्त पदों को भरने के बजाय सरकार ट्रांसफर ड्राइव चलाकर कर्मचारियों को परेशान कर रही है। उनका कहना है कि फार्मासिस्टों की कमी का असर स्वास्थ्य संस्थानों में कामकाज पर पड़ सकता है। ऐसे में पहले भर्ती प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।
मांगें नहीं मानीं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी नेताओं ने मंगलवार की हड़ताल को सरकार के लिए सांकेतिक चेतावनी बताया। उनका कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर विभाग और सरकार से बातचीत चाहते हैं, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। यूनियनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया तो आगामी दिनों में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। इसमें राज्यस्तरीय प्रदर्शन या अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव से पहले विभाग में रिक्त पदों को भरा जाए और रेशनलाइजेशन के नाम पर स्वीकृत पदों को खत्म न किया जाए। अब देखना होगा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी संगठनों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।
