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Hindu Nav Varsh: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष का आगाज, रौद्र संवत में छिपे हैं बड़े बदलाव के संकेत

AAmandeep Singh
19 मार्च से चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष का आगाज, रौद्र संवत में छिपे हैं बड़े बदलाव के संकेत
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धर्म। कल सूर्योदय के साथ ही हिंदू नव वर्ष यानी विक्रम संवत शुरू हो जाएगा। ज्योतिष जगत में इस साल को लेकर खासी चर्चा है क्योंकि पूरे 54 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ‘रौद्र संवत्सर’ का आगमन हो रहा है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस संवत का स्वामी भगवान शिव के रौद्र रूप को माना गया है।

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर शुरू हो रहा यह साल खगोलीय दृष्टि से भी बेहद खास है, क्योंकि इस बार गणना के अनुसार साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे। जानकारों का मानना है कि जब-जब रौद्र संवत आता है, विश्व पटल पर बड़े सत्ता परिवर्तन और सामाजिक उथल-पुथल की स्थितियां बनती हैं।

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गुरु बने राजा और मंगल को मिली कमान, क्या होगा असर?

इस नए संवत्सर के मंत्रिमंडल में देवगुरु बृहस्पति को ‘राजा’ का पद मिला है, जबकि ग्रहों के सेनापति मंगल ‘मंत्री’ की भूमिका में होंगे। गुरु का राजा होना समाज में आध्यात्मिकता और ज्ञान के प्रसार का संकेत है, लेकिन मंत्री के रूप में मंगल का उग्र स्वभाव शासन-प्रशासन में कड़े फैसलों और सैन्य शक्ति के प्रदर्शन को बढ़ावा दे सकता है।

19 मार्च 2026 से शुरू होकर यह संवत 6 अप्रैल 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान शनि मीन राशि में रहकर न्याय की तराजू थामे रहेंगे, वहीं राहु-केतु की टेढ़ी नजर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव ला सकती है।

महंगाई की मार और प्राकृतिक चुनौतियां: आम आदमी पर प्रभाव

ग्रहों की इस विशेष जुगलबंदी का सीधा असर आम आदमी की जेब और जीवन पर पड़ने वाला है। मंगल के प्रभाव के कारण साल के मध्य में महंगाई अपने चरम पर पहुंच सकती है, विशेषकर धातुओं और खाद्यान्न के दामों में भारी उछाल आने के आसार हैं। सोना-चांदी के भाव इस साल नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।

प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी यह साल थोड़ा चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है; कम वर्षा, भूकंप या अचानक आने वाली आपदाएं प्रशासन की परीक्षा ले सकती हैं। राजनीतिक गलियारों में भी असंतोष और आंदोलनों की सुगबुगाहट तेज रहेगी। ज्योतिषियों की सलाह है कि इस ‘रौद्र’ प्रभाव को शांत करने के लिए जनता को धैर्य और सात्विकता का मार्ग अपनाना चाहिए।

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