हिसार। हरियाणा का हिसार जिला आने वाले दिनों में देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने हिसार एयरपोर्ट के पास एक मेगा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) स्थापित करने की दिशा में अपने कदम तेजी से आगे बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना को रफ्तार देने के लिए एक बड़ा वित्तीय फैसला लिया गया। सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए तय की गई करीब 2,988 एकड़ जमीन के ट्रांसफर पर लगने वाले सभी तरह के स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क को पूरी तरह से वेव-ऑफ यानी माफ करने की मंजूरी दे दी है।
दो चरणों में होगा जमीन का हस्तांतरण, 132 करोड़ की बड़ी छूट
सरकार का यह फैसला जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव लाने वाला साबित होगा। दरअसल, यह पूरी जमीन नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) लिमिटेड को सौंपी जानी है, जहां हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स यूनिट्स लगाई जाएंगी। इस परियोजना को दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें पहले चरण के तहत 1,605 एकड़ और दूसरे चरण में 1,383 एकड़ जमीन का ट्रांसफर होना है। टैक्स और फीस माफी के इस फैसले से सरकारी खजाने पर करीब 132.41 करोड़ रुपये का वित्तीय असर पड़ेगा। इसमें लगभग 131.91 करोड़ रुपये की भारी-भरकम स्टांप ड्यूटी और 50 हजार रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस शामिल है, जिसे सरकार ने प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए छोड़ दिया है।
विदेशी निवेश का खुलेगा रास्ता, स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
इस औद्योगिक क्लस्टर के विकसित होने से न केवल हिसार बल्कि पूरे हरियाणा की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी। एविएशन हब के साथ जब यह मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर जुड़ेगा, तो यहां बड़े पैमाने पर विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और व्यापारिक सुविधाएं खड़ी हो सकेंगी। इससे देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों के साथ-साथ विदेशी कंपनियों (FDI) के लिए भी हिसार में निवेश करने का रास्ता साफ होगा। जानकारों का मानना है कि इस कॉरिडोर के तैयार होने के बाद टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों से जुड़े उद्योग यहां अपनी इकाइयां स्थापित करेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों और स्वरोजगार की असीम संभावनाएं पैदा होंगी।

