Holika Dahan 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के साथ ही आज यानी 2 मार्च को पूरे भारत सहित हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-NCR में होलिका दहन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक गणना के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि आज शाम 05:45 बजे से लग रही है, जो अगले दिन 3 मार्च की शाम 05:00 बजे तक चलेगी। पर्व की मुख्य विशेषता यह है कि आज शाम 05:55 बजे से भद्रा काल भी शुरू हो रहा है, जो पूरी रात प्रभावी रहकर कल सुबह 05:28 बजे समाप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, इसलिए प्रदोष काल के दौरान ही पूजन संपन्न करना श्रेष्ठ रहेगा।
केवल 2 घंटे 11 मिनट का श्रेष्ठ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के आधार पर आज होलिका पूजन के लिए श्रद्धालुओं को मात्र 2 घंटे 11 मिनट का समय मिलेगा। पूजन का सबसे सटीक समय शाम 06:19 बजे से शुरू होकर रात 08:30 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में पूजा करना सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए फलदायी माना गया है। भक्त इस दौरान होलिका की अग्नि में अपनी बुराइयों को त्यागने का संकल्प लेते हैं और भगवान नृसिंह व भक्त प्रह्लाद का स्मरण करते हैं।
पूजन सामग्री और विधि का महत्व
होलिका की पूजा में नई फसल के आगमन का जश्न भी झलकता है। सामग्री की सूची में कच्चा सूत, नारियल, घी, अक्षत, चंदन, कपूर और मौसमी फलों का होना अनिवार्य है। विशेष रूप से खेतों से आई गेहूं की नई बालियां (होल) और घर में बने 7 तरह के पकवान अर्पित किए जाते हैं। पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। सबसे पहले जल, दूध और घी की कुछ बूंदें अर्पित कर चंदन और फूलों से श्रृंगार किया जाता है।
परिक्रमा और मंत्रोच्चार से पूर्ण होगी पूजा
होलिका दहन की प्रक्रिया में मंत्रोच्चार का विशेष महत्व है। ‘ओम होलिकायै नम:’, ‘ओम प्रह्लादाय नम:’ और ‘ओम नृसिंहाय नम:’ मंत्रों का जाप करते हुए तीन बार परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटा जाता है। दहन के पश्चात जलती अग्नि में उपले और लकड़ियां डाली जाती हैं। परंपरा के अनुसार, दहन के बाद होलिका की पवित्र राख को माथे पर लगाकर ‘धूलि वंदन’ किया जाता है, जो शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

