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Choose Coconut Water Tips: नारियल पानी का धोखा! अगली बार खरीदने से पहले अपनाएं ये 4 देसी ट्रिक्स, हमेशा निकलेगा लबालब भरा

GGaganpreet Kaur
नारियल पानी का धोखा! अगली बार खरीदने से पहले अपनाएं ये 4 देसी ट्रिक्स, हमेशा निकलेगा लबालब भरा
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डेस्क। पारे की इस लंबी छलांग के बीच जैसे ही आप धूप से झुलसते हुए किसी नारियल वाले के पास रुकते हैं, तो सबसे पहला और घिसा-पिटा सवाल यही होता है—”भैया, पानी ज्यादा निकलेगा न?” ठेले वाला भी बड़ी सहजता से हर नारियल पर कुल्हाड़ी मारकर उसे बेस्ट बता देता है। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब नारियल कटता है। कई बार बाहर से सुंदर और मखमली दिखने वाला फल अंदर से सूखा निकलता है। दरअसल, नारियल चुनना भी एक कला है, जिसके पीछे कोई रॉकेट साइंस नहीं बल्कि हमारे दैनिक जीवन के कुछ सीधे और सरल भौतिक नियम काम करते हैं। अनुभवी बागवानों और रेहड़ी पटरी के जानकारों के मुताबिक, यदि आप खरीदारी के वक्त थोड़ा सजग रहें, तो कभी धोखा नहीं खाएंगे।

1. बड़े साइज के जाल में न फंसें

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अक्सर हमारी इंसानी फितरत होती है कि हम सबसे बड़े आकार की तरफ आकर्षित होते हैं। लेकिन नारियल के मामले में यह थ्योरी पूरी तरह फेल हो जाती है। बहुत बड़े हो चुके नारियल में अमूमन अंदरूनी परत यानी ‘गिरी’ (मलाई) मोटी हो जाती है, जो पानी की जगह को घेर लेती है।

बाजार के जानकारों का कहना है:

“अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ शुद्ध, मीठा पानी पीना है, तो हमेशा मध्यम (Medium) आकार के गोल नारियल का चुनाव करें। अंडाकार या बहुत लंबे दिखने वाले नारियलों की तुलना में गोल और मंझोले आकार के फलों में पानी की मात्रा और उसका प्राकृतिक संतुलन सबसे बेहतरीन होता है।”

2. तराजू के बिना वजन भांपिए

जब आप दो एक जैसे दिखने वाले मध्यम आकार के नारियल अपने दोनों हाथों में उठाएंगे, तो आपको उनके वजन में साफ अंतर महसूस होगा। जो नारियल हाथ में लेते ही आपको अपनी क्षमता से अधिक भारी महसूस हो, उसे तुरंत अपनी टोकरी में डाल लीजिए। पानी का घनत्व मलाई के मुकाबले ज्यादा होता है। भारीपन इस बात का सीधा सबूत है कि प्रकृति ने इसके भीतर पानी को कूट-कूट कर भरा है और अभी इसमें मलाई बनने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

3. कान के पास लाएं और ‘साउंड टेस्ट’ करें

यह सबसे पुराना और अचूक देसी नुस्खा है। नारियल को अपने कान के करीब ले जाएं और उसे हल्के से हिलाएं। यहाँ आपको थोड़ा ध्यान देना होगा:

यदि आवाज बिल्कुल न आए या बहुत कम आए: इसका मतलब है कि नारियल पानी से लबालब (ऊपर तक) भरा हुआ है, जिसके कारण अंदर हवा की जगह नहीं बची है और पानी छलक नहीं पा रहा। यह सबसे उत्तम नारियल है।

यदि ‘छपक-छपक’ की तेज और खाली आवाज आए: तो समझ जाएं कि पानी आधा सूख चुका है और अंदर मलाई गाढ़ी हो चुकी है।

4. रंग की चमक और छिलके की सख्ती

नारियल का बाहरी आवरण उसकी पूरी कुंडली बयां कर देता है। एकदम ताजा और पानी से भरपूर नारियल का रंग हमेशा तोतई या गहरा चमकीला हरा होगा। अगर छिलके पर कहीं पीले या भूरे रंग के धब्बे दिख रहे हैं, या वो सूखा-सूखा सा लग रहा है, तो समझ लीजिए कि वह कई दिनों से धूप में पड़ा है और उसका पानी अंदर ही अंदर भाप बन चुका है। इसके साथ ही, अंगूठे से दबाने पर छिलका न तो पत्थर जैसा सख्त होना चाहिए और न ही पिचपिचा होना चाहिए। एक सामान्य लचीली मजबूती ही सही पके होने की निशानी है।

एक जरूरी सलाह: खरीदने के बाद बरतें ये एहतियात

सही नारियल चुनकर घर लाना आधी जंग जीतने जैसा है, बाकी आधी जंग इस बात पर निर्भर करती है कि आप उसका सेवन कब करते हैं। अक्सर लोग नारियल खरीदकर उसे रसोई की गर्म शेल्फ पर या धूप वाली खिड़की के पास छोड़ देते हैं। जून की इस भीषण गर्मी में रखे रहने से नारियल के अंदर का पानी उबलने जैसी स्थिति में आ जाता है, जिससे उसकी मिठास खत्म हो जाती है और स्वाद कसैला हो जाता है। इसलिए कोशिश करें कि ठेले से कटवाने या घर लाने के कुछ ही घंटों के भीतर इसका आनंद ले लिया जाए, ताकि आपको प्रकृति का यह अमृत अपने असली और ठंडे स्वरूप में मिल सके।

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