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Ice Cream Without Fridge: बिना फ्रिज के भी जम जाएगी बाजार जैसी क्रीमी आइसक्रीम, अपनाएं दादा-दादी के जमाने का यह देसी जुगाड़

GGaganpreet Kaur
बिना फ्रिज के भी जम जाएगी बाजार जैसी क्रीमी आइसक्रीम, अपनाएं दादा-दादी के जमाने का यह देसी जुगाड़
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Ice Cream Without Fridge: आधुनिक तकनीक ने हमारी जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन कई बार यह तकनीक हमें हमारे उन पारंपरिक और बेहद असरदार नुस्खों से दूर कर देती है जो विज्ञान के बुनियादी सिद्धांतों पर काम करते थे। आज महानगरों से लेकर गांवों तक फ्रिज एक आम जरूरत बन चुका है। इसके बावजूद, कई बार बिजली की लंबी कटौती या संसाधनों की कमी के चलते लोग घर पर चीजें बनाने से कतरने लगते हैं। अगर आप भी इसी वजह से बच्चों की पसंदीदा आइसक्रीम घर पर नहीं जमा पा रहे हैं, तो वक्त आ गया है उस पुराने देसी ‘मैजिक’ को अपनी रसोई में वापस लाने का, जिसके जरिए बिना रेफ्रिजरेटर के भी परफेक्ट टेक्सचर वाली आइसक्रीम तैयार की जा सकती है।

थर्मोडायनामिक्स का देसी रूप: बाल्टी, बर्फ और खड़े नमक की जुगलबांदी

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इस पूरी प्रक्रिया का सबसे मुख्य नायक है—मोटा नमक और बर्फ का मिश्रण। दरअसल, शुद्ध बर्फ का तापमान 0°C होता है, जो आइसक्रीम के गाढ़े घोल को पूरी तरह जमाने के लिए पर्याप्त नहीं है। पुरानी तरकीब के अनुसार, एक बड़ी प्लास्टिक या स्टील की बाल्टी में कुचली हुई बर्फ की परत बिछाई जाती है और उस पर भारी मात्रा में खड़ा नमक (लैहौरी या रॉक सॉल्ट) छिड़का जाता है।

विज्ञान के नियम के मुताबिक, नमक मिलते ही बर्फ का गलनांक (फ्रीजिंग पॉइंट) गिर जाता है और बाल्टी के भीतर का तापमान -10°C से लेकर -15°C तक पहुंच जाता है। अब दूध, मलाई, चीनी और अपने पसंदीदा फ्लेवर (जैसे वैनिला या मैंगो) से तैयार गाढ़े मिश्रण को एक एयरटाइट स्टील के कबाड़ या डिब्बे में बंद करके इस बर्फ के ठीक बीचों-बीच दबा दिया जाता है। बाल्टी के भीतर पैदा हुई यह अत्यधिक ठंडक स्टील के बर्तन के जरिए सीधे आइसक्रीम मिक्स तक पहुंचती है।

‘हैंड-चर्न्ड’ तकनीक: बार-बार चलाना क्यों है जरूरी?

शेफ की गुप्त सलाह: “फ्रीजर में आइसक्रीम अपने आप जमती है, लेकिन इस देसी तरीके में आपको हर 20 से 30 मिनट में डिब्बे को खोलकर चम्मच से मिश्रण को अच्छी तरह हिलाना या फेंटना होगा। ऐसा करने से हवा मिश्रण में समाती है और बर्फ के कड़े क्रिस्टल नहीं बन पाते। यही वह सीक्रेट है जो आपकी आइसक्रीम को ‘बर्फ का गोला’ बनने से रोकता है और उसे मखमली मुलायम (क्रीमी) बनाता है।”

तकरीबन दो से तीन घंटे की इस थोड़ी सी मशक्कत के बाद, बाल्टी के भीतर से जो आइसक्रीम निकलती है, उसका स्वाद और सोंधापन आधुनिक रेफ्रिजरेटर में जमी आइसक्रीम से कहीं बेहतर होता है।

मटके की ठंडक और छोटे सांचों का गणित

यदि आपके इलाके में बर्फ मिलना भी मुश्किल है, तो हमारी प्राचीन मिट्टी की संस्कृति यहाँ काम आती है। एक बड़े मिट्टी के घड़े (मटके) में एकदम ठंडा पानी भरकर उसके भीतर आइसक्रीम का छोटा कंटेनर रख दिया जाता है और घड़े को चारों तरफ से गीले सूती कपड़े से लपेट दिया जाता है। हालांकि, यह तरीका आइसक्रीम को पूरी तरह कड़ा नहीं जमा पाता, लेकिन उसे एक बेहतरीन रबड़ी या कुल्फी बेस जैसा ठंडा और गाढ़ा जरूर बना देता है।

इसके साथ ही, एक समझदारी यह भी है कि मिश्रण को किसी बड़े गहरे डिब्बे में जमाने के बजाय छोटी-छोटी कुल्फी की डंडियों या स्टील के छोटे गिलासों में भरा जाए। सतह का क्षेत्रफल (सर्फेस एरिया) कम होने के कारण ठंडक केंद्र तक जल्दी पहुंचती है और आइसक्रीम आधे समय में ही बनकर तैयार हो जाती है।

सावधानियां जो स्वाद बिगड़ने से बचाएंगी

इस पारंपरिक विधि को आजमाते समय सबसे बड़ी सावधानी यह रखनी है कि स्टील के डिब्बे का ढक्कन पूरी तरह वायुरुद्ध (एयरटाइट) होना चाहिए। अगर बाल्टी का नमकीन पानी जरा सा भी रिसकर अंदर चला गया, तो आपकी पूरी मेहनत और स्वाद का कबाड़ा होना तय है। साथ ही, इस विधि के लिए हमेशा फुल-फैट दूध या गाढ़ी मलाई का ही चयन करें, क्योंकि फैट की मात्रा जितनी अच्छी होगी, बिना फ्रिज के मिलने वाला परिणाम उतना ही शानदार होगा। तो इस बार वीकेंड पर बिजली जाने का रोना भूलकर, बच्चों के साथ मिलकर विज्ञान के इस मजेदार प्रयोग को आजमाएं और घर की बनी शुद्ध आइसक्रीम का आनंद लें।

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