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हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल ₹98.31, डीजल ₹90.27 पहुंचा, प्रीमियम पेट्रोल भी ₹106.31 हुआ, महंगाई की पड़ेगी मार

VVinita Kohli
हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल ₹98.31, डीजल ₹90.27 पहुंचा, प्रीमियम पेट्रोल भी ₹106.31 हुआ, महंगाई की पड़ेगी मार
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में तीन रुपए से ज्यादा की वृद्धि की है, जिसके बाद राजधानी शिमला में नॉर्मल पेट्रोल 98.31 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.27 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं प्रीमियम पेट्रोल की कीमत बढ़कर 106.31 रुपए प्रति लीटर हो गई है। ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण राज्य में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 

शिमला के अलावा मंडी और ऊना समेत कई जिलों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। मंडी में नॉर्मल पेट्रोल 97.83 रुपए और डीजल 89.61 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं ऊना में पेट्रोल 93.31 रुपए से बढ़कर 96.03 रुपए और डीजल 85.42 रुपए से बढ़कर 88.01 रुपए प्रति लीटर हो गया है। ऊना में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत भी बढ़कर 104.68 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है। लगातार बढ़ती कीमतों से वाहन चालकों और परिवहन कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। राज्य के पहाड़ी इलाकों में पहले से ही परिवहन लागत अधिक रहती है, ऐसे में ईंधन महंगा होने का असर सीधे रोजमर्रा के खर्च पर पड़ेगा।

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महंगाई बढ़ने की आशंका, सेब बागवानों की बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। बस किराया, मालभाड़ा और परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य वस्तुओं और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। निर्माण सामग्री की ढुलाई महंगी होने से भवन निर्माण कार्यों की लागत बढ़ सकती है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में जहां सामान लंबी दूरी तय कर पहुंचता है, वहां इस बढ़ोतरी का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में और बढ़ोतरी हुई तो बाजार में कई चीजों के दाम बढ़ाना मजबूरी बन जाएगा।

हिमाचल प्रदेश में अगले महीने से सेब सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। सेब की पैकिंग, ट्रांसपोर्ट और मंडियों तक ढुलाई का खर्च अब पहले से ज्यादा होगा। बागवानों का कहना है कि पहले ही मौसम और उत्पादन लागत की चुनौतियों से जूझ रहे किसानों पर अब ईंधन महंगा होने का अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। राज्य के शिमला, किन्नौर और कुल्लू जैसे सेब उत्पादक क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने का असर सीधे किसानों की आय पर पड़ सकता है।

सरकार लगा सकती है अतिरिक्त सेस, जनता पर पड़ सकती है दोहरी मार

इसी बीच आर्थिक संकट से गुजर रही हिमाचल सरकार पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त सेस लगाने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने बजट सत्र में एक संशोधन विधेयक पारित किया था, जिसमें पेट्रोल-डीजल पर अधिकतम 5 रुपए प्रति लीटर तक अनाथ एवं विधवा सेस लगाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस सेस से मिलने वाली राशि का उपयोग अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए किया जाएगा। हालांकि विपक्ष और आम लोग इसे महंगाई बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं। यदि यह सेस लागू होता है तो हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल देश के सबसे महंगे ईंधनों में शामिल हो सकते हैं।

तेल कंपनियों की ओर से कीमतें बढ़ाए जाने के बाद अब अतिरिक्त सेस की संभावना ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। वाहन चालकों, ट्रांसपोर्टरों और कारोबारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते ईंधन दामों से घरेलू बजट प्रभावित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और वृद्धि हुई तो हिमाचल प्रदेश में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर राहत देने का दबाव बढ़ने की संभावना है।

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