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India First Hydrogen Train: जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल सफल, अब धुएं की जगह निकलेगी भाप

GGaganpreet Kaur
जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल सफल, अब धुएं की जगह निकलेगी भाप
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जींद (जग मार्ग)। भारतीय रेलवे के लिए शनिवार का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। हरियाणा के जींद से सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का परीक्षण (Trial) न केवल सफल रहा, बल्कि इसने भारत को वैश्विक रेलवे तकनीक के उस शिखर पर पहुंचा दिया है जहां अब तक केवल जर्मनी और चीन जैसे गिने-चुने देश ही काबिज थे। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार हुई यह 10 डिब्बों वाली ट्रेन न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि अपनी लंबाई और क्षमता के मामले में दुनिया में अद्वितीय मानी जा रही है।

प्रदूषण को ‘बाय-बाय’, सेहत के लिए वरदान

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इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका ईंधन है। पारंपरिक डीजल इंजन जहां भारी मात्रा में कार्बन और जहरीला धुआं छोड़ते हैं, वहीं यह हाइड्रोजन ट्रेन चलने पर केवल पानी की भाप उत्सर्जित करती है। रेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ भारत की लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार साबित होगी। 3200 हॉर्सपावर की क्षमता वाला इसका इंजन इतना शक्तिशाली है कि 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी इसका संतुलन और सुरक्षा मानक विश्वस्तरीय पाए गए।

जींद में बना ‘फ्यूल स्टेशन’, आत्मनिर्भरता की मिसाल

ट्रेन के संचालन के लिए जींद रेलवे स्टेशन पर ही एक विशेष हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। यहाँ ‘इलेक्ट्रोलिसिस’ प्रक्रिया के माध्यम से पानी से ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाती है। सबसे गर्व की बात यह है कि ट्रेन के डिजाइन से लेकर इसकी फ्यूल तकनीक तक, सब कुछ भारतीय इंजीनियरों ने स्वदेशी संसाधनों से तैयार किया है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनी यह ट्रेन एक बार में ढाई हजार से ज्यादा यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाने की क्षमता रखती है, जिससे सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव भी कम होगा।

दुनिया के चुनिंदा ‘पावर हाउस’ देशों में भारत शामिल

इस सफल ट्रायल के साथ ही भारत अब जर्मनी, फ्रांस, चीन और जापान जैसे देशों के उस एलीट क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक है। रेल मंत्रालय की योजना आने वाले समय में ऐसी 35 और ट्रेनें चलाने की है। जींद-सोनीपत रेलवे लाइन पर सुरक्षा जांच के दौरान ब्रेक, सिग्नलिंग और फ्यूल प्रेशर जैसे सभी मानकों पर ट्रेन खरी उतरी है। अब वह दिन दूर नहीं जब भारत का रेल नेटवर्क पूरी तरह से ‘क्लीन और ग्रीन’ नजर आएगा, जिसकी शुरुआत हरियाणा की इस वीर धरा से हो चुकी है।

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