Indian Railways News: ट्रेन के लंबे सफर के दौरान कई बार ऐसी अनहोनी हो जाती है, जो इंसान को बुरी तरह उलझन में डाल देती है। ऐसा ही कुछ कावेरी एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक यात्री के साथ हुआ। रात के वक्त जब सब चैन की नींद सो रहे थे, तभी यात्री के कान में लगा वायरलेस ईयरबड अचानक दुर्घटना का शिकार हो गया।
ईयरबड की सिलिकॉन वाली छोटी सी टिप निकलकर उनके बाएं कान के भीतर जा फंसी। यात्री ने जब उसे खुद निकालने की नादानी की, तो वह और अंदर धंसती चली गई। कुछ ही पलों में कान सुन्न पड़ने लगा और हल्की जलन के साथ ब्लॉकेज का अहसास होने से उस मुसाफिर की हवाइयां उड़ गईं।
रेडिट पर बयां किया अनोखा अनुभव और रेलवे की मुस्तैदी
इस पूरी घटना का जिक्र करते हुए पीड़ित यात्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘रेडिट’ पर एक पोस्ट शेयर की, जिसे बाद में आधिकारिक @indianrailways हैंडल ने भी रीपोस्ट किया। यात्री ने लिखा कि वह आधी रात को चलती ट्रेन में थे और उन्हें डर सता रहा था कि कहीं इस छोटी सी लापरवाही के कारण उन्हें अपना सफर बीच में ही न छोड़ना पड़े। (Kaveri Express medical emergency) लेकिन राहत की बात यह रही कि उन्हें अकेले इस मुसीबत से नहीं जूझना पड़ा। रेलवे के अमले ने उनकी परेशानी को पूरी गंभीरता से लिया और बीच रास्ते में ही डॉक्टर का इंतजाम कर दिया।
139 नंबर बना मददगार, डॉक्टर ने चुटकी में निकाली टिप
घबराहट के उस माहौल में यात्री ने बिना एक पल गंवाए भारतीय रेलवे की इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर 139 पर फोन मिलाया और अपनी आपातकालीन स्थिति दर्ज कराई। (railway earbud stuck in ear) कुछ ही देर में हेल्पलाइन से उनके पास दोबारा कॉल आया और पूछा गया कि क्या एंबुलेंस या डॉक्टर की जरूरत है। इसके बाद रेलवे स्टाफ और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) हरकत में आ गए। जैसे ही ट्रेन जोलारपेट्टई स्टेशन पर पहुंची, वहां पहले से मौजूद एक डॉक्टर ट्रेन के भीतर पहुंचे। डॉक्टर ने बड़ी सावधानी से कान की जांच की और बिना कोई दर्द दिए पलक झपकते ही सिलिकॉन टिप को बाहर निकाल दिया। बाद में डॉक्टर ने ब्लीडिंग आदि की भी पूरी जांच की, जिससे यात्री ने चैन की सांस ली।
सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं रेल मदद की सराहना
यह पोस्ट सामने आने के बाद से ही इंटरनेट पर लोग भारतीय रेलवे के इस चुस्त-दुरुस्त सिस्टम की वाहवाही कर रहे हैं। कई यूजर्स ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ‘रेल मदद’ ऐप और 139 सेवा अब वाकई बहुत तेजी से काम करती है। (Rail Madad app review)
एक यूजर ने लिखा कि यह सुधार वाकई बहुत शानदार है, वहीं दूसरे ने अपनी मां को फूड पॉइजनिंग के दौरान चलती ट्रेन में मिले इलाज का किस्सा साझा किया। इस घटना से यह सबक मिलता है कि सफर के दौरान किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को घबराने के बजाय तुरंत आधिकारिक हेल्पलाइन का सहारा लेना चाहिए, क्योंकि रेलवे का अमला अब हर वक्त यात्रियों की सुरक्षा के लिए मुस्तैद बैठा है।

