ट्रेन में मिलने वाले खाने को लेकर यात्रियों की शिकायतों के बीच भारतीय रेलवे ने बड़ा बदलाव किया है। अब हर खाने के पैकेट पर QR Code होगा, जिसे स्कैन करते ही उसकी पूरी जानकारी सामने आ जाएगी।
इस फैसले का असर सीधे उन लाखों यात्रियों पर पड़ेगा जो रोजाना उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और देशभर में ट्रेन से सफर करते हैं। अब उन्हें खाने की ताजगी को लेकर अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि पुख्ता जानकारी उनके हाथ में होगी।
स्कैन करते ही सामने आएगी खाने की ‘कुंडली’
QR Code स्कैन करने पर यात्रियों को खाना बनने का समय, पैकिंग की तारीख और उस किचन का नाम पता चल जाएगा, जहां खाना तैयार हुआ है। इससे यह साफ हो जाएगा कि खाना ताजा है या कई घंटे पहले बना हुआ।
रेलवे ने अपने बेस किचनों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए हैं और कुछ जगहों पर लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा दी है। इससे खाना बनाने की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा रही है।
अवैध वेंडरों पर सख्ती, अब बिना कोड खाना नहीं चलेगा
स्टेशनों पर बिना लाइसेंस के खाना बेचने वाले वेंडरों की वजह से यात्रियों को लंबे समय से परेशानी होती रही है। QR Code सिस्टम लागू होने के बाद ऐसे वेंडरों की पहचान करना आसान हो जाएगा।
अब यात्री सिर्फ वही खाना खरीदेंगे, जिस पर QR Code होगा और जो अधिकृत किचन से आया होगा। इससे फर्जी और घटिया खाने की सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा।
गलत जानकारी पर तुरंत शिकायत का विकल्प
अगर QR Code स्कैन करने पर जानकारी गलत मिलती है या खाना पुराना निकलता है, तो यात्री तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए रेलवे की ऐप और ‘रेल मदद’ पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस सिस्टम से यात्रियों के पास डिजिटल सबूत होगा, जिससे कार्रवाई तेज होगी। इससे वेंडरों की जवाबदेही भी बढ़ेगी और वे लापरवाही करने से बचेंगे।
इस फैसले से सबसे बड़ा फायदा आम यात्रियों को मिलेगा, खासकर उन लोगों को जो लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। अब उन्हें खाने की क्वालिटी को लेकर बहस नहीं करनी पड़ेगी। यात्रियों को खुद जांच करने की सुविधा मिलने से भरोसा बढ़ेगा और रेलवे की कैटरिंग सेवा में पारदर्शिता आएगी।

