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इंस्टाग्राम ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर अपनाया ‘पूछो मत, बताओ मत’ का रवैया: पूर्व इंजीनियर

VVinita Kohli
इंस्टाग्राम ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर अपनाया ‘पूछो मत, बताओ मत’ का रवैया: पूर्व इंजीनियर

Instagram Child Safety: अमेरिका में मेटा के खिलाफ चल रहे बाल सुरक्षा मुकदमे में कंपनी…

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Instagram Child Safety: अमेरिका में मेटा के खिलाफ चल रहे बाल सुरक्षा मुकदमे में कंपनी के पूर्व इंजीनियरिंग निदेशक आर्तुरो बेजार ने इंस्टाग्राम पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ओकलैंड की संघीय अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दूसरे दिन गवाही देते हुए बेजार ने कहा कि खास तौर पर इंस्टाग्राम पर 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लेकर कंपनी का रवैया ‘पूछो मत, बताओ मत’ जैसा था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेटा उत्पाद तैयार करते समय सुरक्षा की तुलना में यूजर एंगेजमेंट, यानी लोग प्लेटफॉर्म का कितनी बार और कितनी देर इस्तेमाल करते हैं, इस पर ज्यादा ध्यान देती थी।

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यह मुकदमा 29 अमेरिकी राज्यों की ओर से दायर व्यापक मामले का हिस्सा है। फिलहाल कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी की ओर से मामला आगे बढ़ाया जा रहा है और सुनवाई कई सप्ताह चलने की उम्मीद है। राज्यों का आरोप है कि मेटा ने बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक अपने प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाली सुविधाएं जानबूझकर डिजाइन कीं और इससे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नुकसान बढ़ा।

 

13 साल से कम उम्र के बच्चों पर बेजार ने क्या कहा

बेजार ने अदालत में कहा कि उनके शोध के दौरान उन्हें इंस्टाग्राम पर 13 साल से कम उम्र के ‘दसियों हजार’ बच्चे मिले थे। उनके मुताबिक, कंपनी के भीतर यह जानकारी आम थी कि इतनी कम उम्र के बच्चे इंस्टाग्राम इस्तेमाल कर रहे हैं। मेटा की नीति के अनुसार फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करने के लिए न्यूनतम उम्र 13 वर्ष है। राज्यों का आरोप है कि कंपनी ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों का माता-पिता की सहमति के बिना डेटा एकत्र किया, जो अमेरिकी संघीय बाल निजता कानून COPPA के उल्लंघन से जुड़ा मामला है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने जून में बताया था कि अदालत ने मेटा के उस प्रयास को खारिज कर दिया था, जिसमें कंपनी इस मुकदमे को सुनवाई से पहले खत्म कराना चाहती थी।

बेजार ने यह भी कहा कि मेटा के पास फर्जी खातों का पता लगाने के लिए बेहद उन्नत तकनीकी व्यवस्था थी, लेकिन 13 साल से कम उम्र के बच्चों की पहचान करने और उनकी उम्र की जांच करने के लिए कंपनी के पास स्पष्ट लक्ष्य या मापदंड नहीं थे।

 

सुरक्षा से ज्यादा एंगेजमेंट पर जोर देने का आरोप

बेजार ने अपनी गवाही में कहा कि उत्पाद तैयार करने वाली टीमों के प्रदर्शन मूल्यांकन और वेतन-भत्तों में यूजर संख्या और लोगों के प्लेटफॉर्म पर बिताए समय को काफी महत्व दिया जाता था। उनके मुताबिक, इसी व्यवस्था में सुरक्षा बाद की प्राथमिकता बन जाती थी।

उन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक की कई सुविधाओं का भी जिक्र किया। इनमें वीडियो का अपने आप चलना, लगातार कंटेंट दिखना और लाइक, व्यू, कमेंट तथा फॉलोअर्स की संख्या दिखाने वाले काउंटर शामिल हैं। बेजार के अनुसार, ये सुविधाएं लोगों को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने में मदद करती हैं, लेकिन कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए इनके अलग जोखिम हो सकते हैं।

बाल विकास विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर सामाजिक तुलना के प्रति वयस्कों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे में लोकप्रियता, लाइक और फॉलोअर्स को लगातार दिखाने वाली सुविधाएं कुछ किशोरों पर मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति पर सोशल मीडिया के प्रभाव कई व्यक्तिगत और सामाजिक कारकों पर निर्भर करते हैं।

 

29 राज्यों ने मेटा के खिलाफ क्यों किया मुकदमा

2023 में 29 अमेरिकी राज्यों ने मेटा के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा और निजता से जुड़े आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। राज्यों का आरोप है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम की कुछ सुविधाओं को इस तरह डिजाइन किया गया कि बच्चे और किशोर प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताएं। इसके साथ ही राज्यों ने कंपनी पर बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े डेटा को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

मौजूदा सुनवाई कैलिफोर्निया के ओकलैंड की संघीय अदालत में हो रही है। राज्य सरकारें फेसबुक और इंस्टाग्राम के यूजर अनुभव में बदलाव के साथ वित्तीय हर्जाने की भी मांग कर रही हैं। हर्जाने की संभावित राशि को लेकर अदालत में अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं और अंतिम राशि, यदि कोई दायित्व तय होता है, तो अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी।

 

मेटा ने आरोपों को खारिज किया

मेटा ने राज्यों के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि मुकदमे के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य उसकी बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाएंगे।

मेटा के अधिवक्ता पॉल श्मिट ने कहा कि सुनवाई में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, सोशल मीडिया और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होगी। कंपनी का कहना है कि वह किशोरों और अभिभावकों के साथ मिलकर इन चुनौतियों से निपटने की कोशिश करती है।

 

कौन हैं आर्तुरो बेजार

आर्तुरो बेजार ने 2009 से 2015 तक फेसबुक में काम किया था। बाद में वह 2019 से 2021 के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर काम करने के लिए अनुबंध के आधार पर फिर मेटा से जुड़े। साइबरबुलिंग और सोशल मीडिया सुरक्षा पर उनके काम के कारण वह कंपनी के भीतर और बाहर चर्चा में रहे।
2023 में उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के सामने भी सोशल मीडिया और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गवाही दी थी। मौजूदा मुकदमे में वह राज्यों की ओर से पेश किए गए प्रमुख गवाहों में शामिल हैं। उनकी गवाही का केंद्र यह सवाल है कि मेटा को कम उम्र के उपयोगकर्ताओं और प्लेटफॉर्म से जुड़े संभावित नुकसान की कितनी जानकारी थी और कंपनी ने उन जोखिमों पर क्या कार्रवाई की।

 

मामला क्यों अहम है

यह मुकदमा सिर्फ मेटा पर संभावित आर्थिक दंड तक सीमित नहीं है। यदि अदालत राज्यों के दावों को स्वीकार करती है, तो फेसबुक और इंस्टाग्राम के डिजाइन, बच्चों की उम्र की पहचान, डेटा संग्रह और सुरक्षा उपायों में बदलाव की दिशा खुल सकती है। मामले की सुनवाई अभी जारी है और बेजार की गवाही आरोपों का हिस्सा है, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं। मेटा आरोपों से इनकार कर रही है, इसलिए मामले में आगे आने वाली गवाही, दस्तावेज और अदालत की कार्यवाही यह तय करने में अहम होगी कि राज्यों के आरोप कितने साबित होते हैं।

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