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International Yoga Day 2026: इस बार बुजुर्गों की सेहत पर फोकस, जानिए क्या है साल 2026 की खास थीम

AAmandeep Singh
International Yoga Day 2026: इस बार बुजुर्गों की सेहत पर फोकस, जानिए क्या है साल 2026 की खास थीम
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स्वास्थ्य। आज भागदौड़ भरी जिंदगी, मानसिक तनाव और बीमारियों से घिरे समाज के लिए योग एक संजीवनी बूटी की तरह उभरकर सामने आया है। यही वजह है कि हर साल 21 जून को जब सूरज की पहली किरण धरती पर पड़ती है, तो दुनिया के कोने-कोने में करोड़ों लोग एक साथ योग मुद्राओं में लीन नजर आते हैं। योग महज हाथ-पैर हिलाने वाली कसरत नहीं है, बल्कि यह हमारे मन, शरीर और आत्मा के बीच एक ऐसा सेतु तैयार करता है जो इंसान को आंतरिक शांति देता है। अब यह किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक वैश्विक जीवन शैली बन चुका है।

साल 2026 की थीम: बुजुर्गों की सेहत को समर्पित

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हर साल संयुक्त राष्ट्र इस दिवस के माध्यम से समाज को एक नया संदेश देने की कोशिश करता है। इस बार, यानी वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग” रखी गई है। इस विषय को चुनने के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह साफ करना है कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर में आने वाले बदलावों और तकलीफों को योग के जरिए न सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि बुढ़ापे को भी ऊर्जावान और खुशहाल बनाया जा सकता है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि योग की छतरी के नीचे हर उम्र का व्यक्ति अपनी मानसिक और भावनात्मक सेहत को दुरुस्त रख सकता है।

कैसे हुई इस खास दिन की शुरुआत?

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का पूरा इतिहास भारत के गौरव और वैश्विक कूटनीति की एक शानदार मिसाल है। साल 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने योग के महत्व को रखते हुए इसके लिए एक विशेष दिन तय करने का प्रस्ताव रखा था। भारत के इस विचार को दुनिया ने हाथों-हाथ लिया और रिकॉर्ड 175 देशों के समर्थन के साथ महज तीन महीने के भीतर, 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित कर दिया। इसके बाद 21 जून 2015 को पहला वैश्विक योग दिवस मनाया गया, जिसने इतिहास रच दिया।

21 जून की तारीख के पीछे का आध्यात्मिक विज्ञान

कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर योग के लिए 21 जून का ही दिन क्यों चुना गया? दरअसल, वैज्ञानिक और भौगोलिक नजरिए से 21 जून साल का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे ‘ग्रीष्म संक्रांति’ भी कहते हैं। इस समय सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि धरती के उत्तरी हिस्से में सबसे ज्यादा रोशनी और ऊर्जा रहती है। भारतीय यौगिक परंपरा में इस संक्रमण काल को बेहद पवित्र और आध्यात्मिक नजरिए से अत्यधिक फलदायी माना गया है, क्योंकि इस समय प्रकृति स्वयं बदलाव और सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए तैयार होती है।

आज के दौर में क्यों जरूरी है योग?

आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां जहां बीमारियों के इलाज पर ध्यान देती हैं, वहीं योग इंसान को बीमार न पड़ने की कला सिखाता है। नियमित रूप से योग और प्राणायाम करने से न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, बल्कि आज के दौर की सबसे बड़ी समस्या यानी डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक तनाव से भी परमानेंट राहत मिलती है। यह एकाग्रता बढ़ाने और जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का सबसे सरल और बिना खर्च वाला माध्यम है। आज योग वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक साख (Soft Power) का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है।

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