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Italy Blue Crab: इटली के समुद्र में ‘ब्लू क्रैब’ का कहर, 1800 करोड़ के नुकसान के बाद उतारी गई 1.30 लाख ऑक्टोपस की आर्मी

AAmandeep Singh
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Italy Blue Crab: इटली के समुद्र में 'ब्लू क्रैब' का कहर, 1800 करोड़ के नुकसान के बाद उतारी गई 1.30 लाख ऑक्टोपस की आर्मी

इटली के समुद्र में ‘ब्लू क्रैब’ का कहर, 1800 करोड़ के नुकसान के बाद उतारी गई 1.30 लाख ऑक्टोपस की आर्मी

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Italy Blue Crab: इटली के खूबसूरत समुद्री तटों और समृद्ध एक्वाकल्चर उद्योग पर इन दिनों एक छोटे से जीव ने ऐसा कहर बरपा रखा है कि देश के वैज्ञानिक से लेकर सरकार तक सब परेशान हैं। ‘ब्लू क्रैब’ यानी नीले केकड़ों की अनियंत्रित होती आबादी ने स्थानीय मछुआरों और सीफूड कारोबार की कमर तोड़कर रख दी है। इस जैविक संकट से निपटने के लिए इटली ने अब किसी जहरीले केमिकल या मशीनों का सहारा लेने के बजाय प्रकृति के अपने तंत्र को आजमाया है। वैज्ञानिकों ने नीले केकड़ों के सबसे बड़े प्राकृतिक दुश्मन यानी ऑक्टोपस की एक विशाल ‘आर्मी’ समुद्र में उतार दी है।

मूल रूप से अटलांटिक महासागर की प्रजाति ‘ब्लू क्रैब’ दशकों पहले मालवाहक जहाजों के बैलास्ट वॉटर के जरिए इटली के समुद्री इलाकों तक पहुंची थी। इटली का अनुकूल समुद्री माहौल इन्हें इतना रास आया कि इनकी संख्या विस्फोटक रूप से बढ़ने लगी। करीब दो पाउंड वजनी इन केकड़ों के पंजों में इतनी ताकत होती है कि ये मछुआरों के मजबूत जाल तक फाड़ डालते हैं और समुद्र की तली में मौजूद क्लैम, मसल्स और शेलफिश को भारी मात्रा में चट कर रहे हैं।

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200 मिलियन यूरो का फटका, 70% तक घटा क्लैम उत्पादन

इटली के कृषि और मत्स्य संगठन ‘कोल्डिरेटी’ के आंकड़ों के मुताबिक, नीले केकड़ों के इस हमले से देश के सीफूड उद्योग को अब तक 200 मिलियन यूरो (लगभग 1800 करोड़ रुपये) से अधिक का भारी-भरकम नुकसान हो चुका है। देश के एमिलिया-रोमाग्ना क्षेत्र में तो विश्वप्रसिद्ध क्लैम का उत्पादन 70 प्रतिशत तक गिर गया है। एमिलिया-रोमाग्ना के कृषि और मत्स्य विभाग के अधिकारी एलेसियो ममी ने इसे इटली के समुद्री पर्यावरण और तटीय अर्थव्यवस्था पर आया अब तक का सबसे बड़ा संकट करार दिया है।

‘ऑक्टो-ब्लू’ प्रोजेक्ट: लैब में तैयार 1.30 लाख बेबी ऑक्टोपस की समुद्र में तैनाती

इस भयावह आपदा से निपटने के लिए बोलोग्ना यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ‘ऑक्टो-ब्लू’ नाम से एक बेहद अनूठा मिशन शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत एड्रियाटिक तट के बेहद प्रभावित इलाके रिकसिओन और सेसेनाटिको के समुद्र में लैब में संवर्धित (ब्रीड) किए गए करीब 1.30 लाख नन्हें ऑक्टोपस छोड़े गए हैं।

प्रोजेक्ट के प्रमुख डॉ. ओलिविएरो मोर्डेंटी ने बताया कि जब ये ऑक्टोपस महज कुछ मिलीमीटर के थे, तभी इन्हें पानी में उतारा गया और उनके बचाव के लिए समुद्र के भीतर कृत्रिम ठिकाने (आर्टिफिशियल शेल्टर) भी बनाए गए हैं। प्राकृतिक रूप से ऑक्टोपस केकड़ों के सबसे बड़े शिकारी होते हैं। वैज्ञानिकों का आकलन है कि वयस्क होने पर एक ऑक्टोपस रोजाना कम से कम 4 ब्लू क्रैब को अपना निवाला बनाएगा। चूंकि एक मादा ब्लू क्रैब 15 से 20 लाख तक अंडे देती है, इसलिए यदि एक मादा केकड़ा भी शिकार बनती है तो इनकी लाखों की आबादी पर ब्रेक लग जाएगा।

समुद्र लांघकर ‘पो’ नदी तक पहुंचे केकड़े, डिश बनाकर खाने की अपील भी बेअसर

ब्लू क्रैब की यह आक्रामक प्रजाति अब सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रही है। वैज्ञानिकों के होश तब उड़ गए जब ये केकड़े इटली की सबसे लंबी नदी ‘पो’ के मुहाने से करीब 100 मील दूर गुस्टाला के पास मीठे पानी में तैरते पकड़े गए। फेरारा यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक अन्ना गविओली के अनुसार, यूरोप में मीठे पानी की नदियों में इतनी दूर तक समुद्री केकड़ों का पहुंचना एक दुर्लभ और चिंताजनक घटना है। जब इनकी संख्या समुद्र में हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो ये नए इलाकों की ओर रुख करने लगते हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इटली सरकार अब आम नागरिकों को ब्लू क्रैब को अपनी डाइट में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सुपरमार्केट्स में इन्हें बेचने की छूट दी गई है और बड़े-बड़े रेस्तरां में नीले केकड़ों से बने पास्ता और सलाद परोसे जा रहे हैं। हालांकि, इनकी आबादी की रफ्तार इतनी तेज है कि इंसानों की थाली तक पहुंचना भी इस संकट को कम नहीं कर पा रहा है। अब पूरी उम्मीद वैज्ञानिकों की इस ‘ऑक्टोपस ब्रिगेड’ पर ही टिकी हुई है।

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