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Jhajjar Fire News: झज्जर में रात का सन्नाटा चीख-पुकार में बदला: मां-बेटी के लिए देवदूत बने पड़ोसी

AAmandeep Singh
झज्जर में रात का सन्नाटा चीख-पुकार में बदला: मां-बेटी के लिए देवदूत बने पड़ोसी
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झज्जर। हरियाणा के झज्जर शहर का दिल्ली गेट इलाका बुधवार की रात एक बड़ी त्रासदी का गवाह बनते-बनते रह गया। मुख्य बाजार स्थित एक मकान में शॉर्ट सर्किट ने ऐसी तबाही मचाई कि देखते ही देखते सब कुछ स्वाहा हो गया। आग इतनी तेजी से भड़की कि मकान मालकिन मीना और उनकी बेटी पायल को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। घर की दीवारों और छत पर सजावट के लिए लगी पीवीसी (PVC) ने आग के लिए ईंधन का काम किया, जिससे पूरे घर में जहरीला काला धुआं भर गया। अगर मोहल्ले के लोग समय पर सुध न लेते, तो धुआं ही जान लेने के लिए काफी था।

शटर बंद था और अंदर घुट रहा था दम

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पीड़ित मीना ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि रात को अचानक बिजली के तारों से उठी चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया। उस वक्त मीना के साथ उनकी बेटी पायल और बेटा जतिन घर में ही थे। आग की लपटें देख पड़ोसियों ने शोर मचाना शुरू किया, लेकिन घर का मुख्य शटर अंदर से बंद होने के कारण बाहर निकलने का रास्ता ब्लॉक था। खतरे को भांपते हुए पड़ोसियों ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाला और शटर का ताला तोड़कर मां-बेटी को सुरक्षित बाहर खींच लिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह रेस्क्यू ऑपरेशन महज कुछ मिनटों का फासला था; थोड़ी भी देरी किसी बड़ी अनहोनी में बदल सकती थी।

दमकल से पहले पड़ोसियों ने संभाला मोर्चा

मीना के देवर सतीश कुमार ने बताया कि हादसे की खबर मिलते ही फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। हालांकि, दमकल की गाड़ियों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासियों ने बाल्टियों में पानी और रेत भरकर आग पर काबू पाने की जद्दोजहद शुरू कर दी थी। लोगों की इस एकजुटता का ही नतीजा था कि आग आसपास के सटे हुए मकानों तक नहीं पहुंच पाई। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह बुझाया और कूलिंग का काम शुरू किया।

विधवा महिला का आशियाना उजाड़ा, अब मदद की आस

इस आगजनी ने पीड़ित परिवार की कमर तोड़ दी है। घर के बाहर खड़ी मोटरसाइकिल, इनवर्टर, सोफा सेट और कीमती लकड़ी का फर्नीचर राख के ढेर में तब्दील हो चुका है। शुरुआती आकलन के अनुसार नुकसान लाखों रुपयों में है। मकान मालकिन मीना के सिर से पति का साया पहले ही उठ चुका है और घर में कोई दूसरा कमाने वाला सदस्य नहीं है। बदहवास मीना ने प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है ताकि इस तबाही के बाद वे अपनी छत को फिर से रहने लायक बना सकें।

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