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Jind BKU Protest Warning: किसान भवन के सामने की सड़क बनी तालाब, भाकियू ने प्रशासन को दी आर-पार की चेतावनी

GGaganpreet Kaur
किसान भवन के सामने की सड़क बनी तालाब, भाकियू ने प्रशासन को दी आर-पार की चेतावनी
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जींद (दलेर सिंह) सरकारें और स्थानीय प्रशासन शहरों को ‘स्मार्ट’ बनाने और बुनियादी ढांचा सुधारने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जींद की शिव कॉलोनी में आकर दम तोड़ देती है। यहां के किसान भवन के सामने की मुख्य गली पिछले एक साल से प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रही है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और उनमें महीनों से सड़ रहा बारिश व सीवरेज का पानी अब न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। आखिरकार, व्यवस्था से तंग आकर किसान संगठन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

भाकियू के जिला प्रेस प्रवक्ता रामराजी ढुल पोंकरीखेड़ी ने इस बदहाली पर कड़ा रोष जताते हुए सीधे तौर पर नगर परिषद प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि किसान भवन वह जगह है जहां जिलेभर से सैकड़ों किसान अपनी समस्याओं को लेकर रोज आते हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि जिस जगह किसानों के हक की आवाज बुलंद होती है, उसी के मुख्य द्वार के सामने प्रशासनिक लापरवाही का गंदा पानी जमा है। यहां से पैदल गुजरना तो दूर, दोपहिया वाहनों का निकलना भी किसी खतरे से खाली नहीं है।

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“जेई साहब सुनते नहीं, दफ्तरों के चक्कर काटकर थक गए”

किसान नेताओं का आरोप है कि वे पिछले एक साल के दौरान शायद ही कोई ऐसा अधिकारी बचा हो जिसके दरवाजे पर अर्जी लेकर न गए हों। रामराजी ढुल ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे व्यक्तिगत रूप से नगर परिषद के संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) से कई मर्तबा मिले। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया, धरातल पर एक ईंट तक नहीं लगाई गई। अफसरों के इस अड़ियल और संवेदनहीन रवैये के कारण पूरी कॉलोनी के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, और मच्छरों के पनपने से बीमारी फैलने का खतरा अलग से मंडरा रहा है।

5 जून की बैठक से पहले समाधान नहीं तो खैर नहीं

इस बार भाकियू ने केवल मांग पत्र सौंपने के बजाय सीधे अल्टीमेटम थमाया है। संगठन के मुताबिक, आगामी 5 जून को जींद के इसी किसान भवन में यूनियन की एक बेहद महत्वपूर्ण और राज्य स्तरीय रणनीतिक बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में प्रदेशभर के बड़े किसान नेता शामिल होंगे। भाकियू ने प्रशासन को कड़े लहजे में सचेत किया है कि यदि इस बैठक की तारीख से पहले गली की मुकम्मल मरम्मत नहीं की गई और जलभराव को स्थायी रूप से ठीक नहीं किया गया, तो संगठन को मजबूरन कोई बड़ा और कड़ा फैसला (आंदोलन) लेना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

अब देखना यह होगा कि हमेशा की तरह कुंभकर्णी नींद में सोया नगर परिषद अमला इस चेतावनी के बाद हरकत में आता है या फिर 5 जून को जींद की सड़कों पर एक बार फिर किसानों का उग्र आंदोलन देखने को मिलता है।

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