Jind child marriage: हरियाणा में बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के बीच जींद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। करसिंधु गांव में एक ही मंडप के नीचे दो सगी बहनों की शादी की शहनाइयां बज रही थीं, लेकिन ऐन वक्त पर पहुंचे प्रशासनिक अमले ने इस खुशी को रोक दिया।
महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी कार्यालय को किसी ने गुप्त सूचना दी थी कि गांव में दो नाबालिग बच्चियों का बाल विवाह कराया जा रहा है और बारात पड़ोसी जिले हिसार के मिर्जापुर गांव से आई है। सूचना मिलते ही विभाग के रवि लोहान, महिला पुलिस बल और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की संयुक्त टीम तुरंत हरकत में आई और विवाह स्थल पर जा धमकी।
तीन घंटे तक चला टालमटोल का खेल, दस्तावेजों ने खोली पोल
शादी के पंडाल में पहुंची टीम ने जब परिजनों से दुल्हनों की उम्र के प्रमाण मांगे, तो वहां हड़कंप मच गया। परिजनों ने अधिकारियों को गुमराह करने की भरपूर कोशिश की और दावा किया कि दोनों लड़कियां बालिग हैं। लेकिन टीम ने जब सख्ती दिखाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, तो करीब तीन घंटे तक चले मान-मनौव्वल और कागजातों की जांच के बाद सच सामने आ गया।
स्कूल के रिकॉर्ड और जन्म प्रमाणपत्रों की जांच करने पर दोनों दुल्हनों की उम्र 18 साल से कम पाई गई। बात यहीं खत्म नहीं हुई, जब बारातियों और दूल्हों के दस्तावेजों की पड़ताल की गई, तो उनमें से एक दूल्हा भी 21 वर्ष की कानूनी आयु से छोटा निकला। यानी एक ही मंडप में तीन-तीन नाबालिगों की जिंदगी दांव पर लगाई जा रही थी।
खर्चा बचाने के लिए की जा रही थी दोनों बहनों की संयुक्त शादी
जब अधिकारियों ने परिजनों से इस गैरकानूनी कदम की वजह पूछी, तो उन्होंने अपनी दलील में गरीबी और नासमझी का हवाला दिया। परिजनों का कहना था कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं और उन्हें बाल विवाह से जुड़े कड़े कानूनों की कोई जानकारी नहीं थी। उनका तर्क था कि दोनों बहनों की शादी एक साथ करने से दो बार का खर्च बच जाता, इसलिए उन्होंने यह जोखिम उठाया। हालांकि, कानून के आगे उनकी एक नहीं चली और अधिकारियों ने उन्हें साफ शब्दों में समझा दिया कि गरीबी या पैसे बचाने का बहाना कानून तोड़ने का लाइसेंस नहीं बन सकता।
समझाइश के बाद परिजनों ने दी लिखित माफी, लौटी बारात
‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ और एमडीडी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों समेत प्रशासनिक टीम ने दोनों पक्षों के बड़े-बुजुर्गों को बैठाकर बाल विवाह के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्हें बताया गया कि कम उम्र में शादी होने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है, जो उनके भविष्य के लिए घातक है।
साथ ही सरकार द्वारा बालिग होने पर शादी करने पर मिलने वाली विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों की इस समझाइश और कड़ी चेतावनी का असर हुआ और परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। उन्होंने लिखित में आश्वासन दिया कि वे कानून का पूरा सम्मान करेंगे और अब दोनों लड़कियों के बालिग होने के बाद ही उनका विवाह रचाएंगे। इसके बाद शादी की सभी रस्में तुरंत प्रभाव से रोक दी गईं और बिना फेरे लिए ही दोनों बारातें अपने घरों को वापस लौट गईं।

