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Jind Insurance Fraud: जींद में 'मुर्दे' को दोबारा अस्पताल में भर्ती कर मार डाला, ₹6.88 लाख का बीमा क्लेम हड़पने का खौफनाक खेल

GGaganpreet Kaur
जींद में 'मुर्दे' को दोबारा अस्पताल में भर्ती कर मार डाला, ₹6.88 लाख का बीमा क्लेम हड़पने का खौफनाक खेल
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जींद। कानून की आंखों में धूल झोंककर पैसे कमाने के लिए लोग किस हद तक जा सकते हैं, इसका जीता-जागता और सनसनीखेज उदाहरण जींद में देखने को मिला है। यहां एक शातिर गिरोह और निजी अस्पताल के गठजोड़ ने एक ऐसे व्यक्ति को कागजों पर दोबारा जिंदा कर दिया, जो दो साल पहले ही दुनिया छोड़ चुका था। इसके बाद बकायदा अस्पताल के रिकॉर्ड में उसका ‘इलाज’ चला और फिर उसे मृत घोषित कर एक नया मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी करवा लिया गया। यह पूरा स्वांग किसी और वजह से नहीं, बल्कि इंश्योरेंस (बीमा) कंपनी से करीब पौने सात लाख रुपये का क्लेम हड़पने के लिए रचा गया था।

मामले की तह में जाएं तो रोहतास (पुत्र तिलोकाराम) मूल रूप से राजस्थान के भादरा तहसील के नहराना गांव का रहने वाला था। वह काफी साल पहले राजस्थान छोड़कर हरियाणा के हिसार में आकर बस गया था। रिकॉर्ड के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2024 को हिसार के न्यू ऋषि नगर में उसकी स्वाभाविक मौत हो गई थी, जिसे वहां की स्थानीय आंगनबाड़ी और डेथ रिकॉर्ड में बकायदा दर्ज भी किया गया था। परिवार ने तब इसका अंतिम संस्कार भी कर दिया था।

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पत्नी पर लगा साजिश का आरोप, ₹6.88 लाख की ठगी

ट्विस्ट तब आया जब इस घटना के ठीक एक साल बाद, यानी 14 अप्रैल 2025 को रोहतास के नाम पर जींद के एक निजी अस्पताल से एक और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होता है। हनुमानगढ़ के रहने वाले शिकायतकर्ता श्याम सुंदर ने इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान के गोगामेड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई। श्याम सुंदर का सीधा आरोप है कि मृतक रोहतास की पत्नी ने बीमा कंपनी को चूना लगाने के लिए यह खौफनाक ताना-बाना बुना।

शिकायत में कहा गया है कि पहली मौत के बाद बीमा राशि मिलने में तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं, जिसके बाद आरोपियों ने जींद के एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों से सांठगांठ की। रोहतास को अस्पताल के कागजों में गंभीर बीमार दिखाकर आईसीयू या वार्ड में भर्ती दिखाया गया और फिर उसकी ‘दूसरी मौत’ की तारीख तय कर दी गई। इस फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे आरोपियों ने बीमा कंपनी से 6 लाख 88 हजार 434 रुपये की रकम सीधे अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली।

गोगामेड़ी पुलिस ने झाड़ा पल्ला, जींद डीएसपी बोले- ‘मिले शिकायत तो करें कार्रवाई’

इस हाई-प्रोफाइल जालसाजी की जांच जैसे ही आगे बढ़ी, पुलिसिया सीमा विवाद आड़े आ गया। गोगामेड़ी थाना प्रभारी प्रवीण श्योराण ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जब उन्होंने प्राथमिक तफ्तीश की, तो पता चला कि मृतक रोहतास पिछले 20 साल से उनके इलाके में रह ही नहीं रहा था। चूंकि फर्जी दाखिला और फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाने का कथित अपराध जींद के अस्पताल में हुआ है, इसलिए राजस्थान पुलिस के अधिकार क्षेत्र में यह मामला नहीं आता। गोगामेड़ी पुलिस ने फिलहाल केस की फाइल बंद कर शिकायतकर्ता को जींद पुलिस की शरण में जाने की हिदायत दी है।

दूसरी ओर, इस तकनीकी पेंच पर जींद के डीएसपी (मुख्यालय) ने अपना रुख साफ किया है। जींद पुलिस का कहना है कि मामला निश्चित तौर पर गंभीर है और मेडिकल एथिक्स व जालसाजी का बड़ा उदाहरण है। डीएसपी हेडक्वार्टर के मुताबिक, जैसे ही राजस्थान पुलिस या शिकायतकर्ता के माध्यम से इस धोखाधड़ी की आधिकारिक कॉपी जींद पुलिस को प्राप्त होती है, बिना वक्त गंवाए संबंधित निजी अस्पताल और साजिशकर्ताओं के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

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