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Jind Assembly Constituency Update: जींद बनेगा नया पावर सेंटर: परिसीमन के बाद स्वतंत्र लोकसभा क्षेत्र की तैयारी, बढ़ेंगी 3 विधानसभा सीटें

AAmandeep Singh
जींद बनेगा नया पावर सेंटर: परिसीमन के बाद स्वतंत्र लोकसभा क्षेत्र की तैयारी, बढ़ेंगी 3 विधानसभा सीटें
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जींद। हरियाणा की राजनीति का ‘दिल’ कहे जाने वाले जींद जिले में इन दिनों चुनावी सुगबुगाहट से ज्यादा परिसीमन (Delimitation) की चर्चाएं गर्म हैं। जनगणना की सुस्त पड़ी प्रक्रिया के बीच जैसे ही 2029 के परिसीमन की अटकलें तेज हुई हैं, जिले के दिग्गजों से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं तक की धड़कनें बढ़ गई हैं। कयासों के मुताबिक, आगामी परिसीमन न केवल जींद की भौगोलिक सीमाओं को बदलेगा, बल्कि जिले को एक स्वतंत्र लोकसभा क्षेत्र के रूप में भी स्थापित करेगा।

90 नहीं 117 विधानसभा और 13 लोकसभा सीटों का गणित

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सियासी गलियारों में चर्चा है कि 2029 के आम चुनाव तक हरियाणा का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा। माना जा रहा है कि प्रदेश में विधानसभा की सीटें 90 से बढ़कर 117 और लोकसभा की सीटें 10 से बढ़कर 13 हो सकती हैं। फिलहाल जींद जिला तीन अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों (हिसार, सोनीपत और सिरसा) में बंटा हुआ है, लेकिन परिसीमन के बाद जींद खुद एक ‘पावर सेंटर’ बनकर उभरेगा।

अटकलों पर यकीन करें तो प्रस्तावित जींद लोकसभा क्षेत्र में 9 विधानसभा हलके शामिल हो सकते हैं। इनमें जिले के जुलाना, सफीदों, उचाना कलां और जींद के अलावा नए प्रस्तावित क्षेत्र जींद ग्रामीण और कंडेला शामिल होंगे। साथ ही पानीपत का इसराना व मतलोडा मंडी और रोहतक का लाखन माजरा भी इसी लोकसभा के पाले में आ सकते हैं। वहीं, नरवाना को कैथल लोकसभा में शामिल किए जाने की संभावना है।

तीन रास्तों ने बढ़ाई नेताओं की उलझन

सबसे रोचक स्थिति जींद विधानसभा क्षेत्र की है। अब तक यहाँ एक ही सीट थी, लेकिन उभरती तस्वीर के अनुसार अब यहाँ जींद शहरी, जींद ग्रामीण और कंडेला के रूप में तीन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र बनने के आसार हैं। चंडीगढ़ की विधानसभा तक पहुँचने की हसरत रखने वाले नेताओं के सामने अब एक की बजाय तीन राहें होंगी। हालांकि, कंडेला और जींद ग्रामीण के भूगोल को लेकर अभी भी संशय है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि गाँवों की अदला-बदली से कई कद्दावर नेताओं के वोट बैंक में सेंध लग सकती है, यही वजह है कि कई दिग्गज फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहे हैं।

पार्टियों की रणनीति: कहीं उत्साह, कहीं ठहराव

परिसीमन की इस सुगबुगाहट ने टिकट के दावेदारों के मन में लड्डू भी फोड़े हैं और चिंता भी बढ़ाई है। बीजेपी और कांग्रेस: इन दोनों प्रमुख पार्टियों में टिकट चाहने वालों की लंबी कतार है। नेताओं को लगता है कि सीटें बढ़ने से उनकी ‘लॉटरी’ आसानी से लग सकती है, इसलिए वे परिसीमन के बारीक पहलुओं पर नजर गड़ाए हुए हैं।

इनेलो (INLD): पार्टी इस मौके को भांपते हुए दूसरे दलों के असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में लाने की कसरत में जुटी है। आप और जेजेपी: आम आदमी पार्टी और जननायक जनता पार्टी फिलहाल जमीनी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रही हैं। जेजेपी के लिए अपना गढ़ बचाने की चुनौती है, तो ‘आप’ नए समीकरणों में सेंध लगाने की तैयारी में है।

बिसात बिछाने से पहले पुख्ता तस्वीर का इंतजार

फिलहाल जींद की राजनीति में संशय का दौर है। कौन सा गाँव किस हलके का हिस्सा बनेगा, इसका अंतिम फैसला होने के बाद ही नेता अपने लिए ‘मैदान’ का चयन करेंगे। नेताओं की असली सक्रियता परिसीमन की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही दिखाई देगी, लेकिन इतना तय है कि जींद की आने वाली तस्वीर जिले को हरियाणा की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बना देगी।

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