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Raja ki Kothi Jind: जींद में नरक जैसी जिंदगी: राजा की कोठी में नालियां नहीं, बाल्टियों से गंदा पानी फेंकने को मजबूर हैं लोग

GGaganpreet Kaur
जींद में नरक जैसी जिंदगी: राजा की कोठी में नालियां नहीं, बाल्टियों से गंदा पानी फेंकने को मजबूर हैं लोग
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जींद (दलेर सिंह)। डिजिटल इंडिया और शहरों के आधुनिकीकरण के तमाम दावों के बीच जींद से एक ऐसी जमीनी हकीकत सामने आई है, जो स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शहर से बिल्कुल सटे अमरहेड़ी गांव के दायरे में आने वाले ‘राजा की कोठी’ क्षेत्र के बाशिंदे इस आधुनिक दौर में भी आदिम युग जैसी बदहाली झेल रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के नाम पर इस पूरी कॉलोनी में न तो नालियां हैं और न ही पक्की सड़कें। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि लोगों का अपने घरों से बाहर कदम रखना भी किसी सजा से कम नहीं है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूरी कॉलोनी को मुख्य शहर से जोड़ने के लिए केवल एक ही मुख्य रास्ता है। इसी संकरी और जर्जर सड़क से रोज सैकड़ों परिवारों के लोग, कामकाजी महिलाएं और बुजुर्ग गुजरते हैं। इतना ही नहीं, शहर के एक नामी निजी स्कूल के बच्चे भी रोज इसी कीचड़ और गंदे पानी के बीच से होकर गुजरने को मजबूर हैं। कई बार बच्चे इस दलदल में गिरकर चोटिल हो चुके हैं और उनके कपड़े खराब हो जाते हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

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पेठा फैक्ट्री के मलबे और केमिकल ने बढ़ाई आफत

कॉलोनी के लोगों का गुस्सा उस समय और भड़क गया जब गली में स्थित एक पेठा निर्माण इकाई (पेठा बनाने वाली फैक्ट्री) ने अपने कारखाने का गंदा पानी और बचा हुआ मलबा खुलेआम मुख्य रास्ते पर बहाना शुरू कर दिया। इस वजह से पूरी सड़क ऊबड़-खाबड़ दलदल में तब्दील हो चुकी है। चिलचिलाती धूप में इस मलबे के सड़ने के कारण पूरे इलाके में इस कदर बदबू और सड़ांध फैली हुई है कि लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों को डर है कि अगर जल्द ही इस पानी को साफ नहीं किया गया, तो इलाके में मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी भयंकर महामारियां फैल सकती हैं।

खुद गड्ढा खोदो, बाल्टियों से पानी बाहर फेंको

इस आधुनिक युग में राजा की कोठी क्षेत्र के लोग जल निकासी के लिए एक बेहद अजीब और थका देने वाला तरीका अपनाने को मजबूर हैं। कॉलोनी में नालियां न होने के कारण लोगों ने मजबूरी में अपने-अपने घरों के ठीक सामने बड़े-बड़े गड्ढे खोद रखे हैं। दिनभर के इस्तेमाल का गंदा पानी इन गड्ढों में इकट्ठा होता रहता है। इसके बाद परिवार के सदस्य सुबह-शाम बाल्टियां लेकर इन गड्ढों से गंदा पानी निकालते हैं और उसे दूर खाली प्लॉटों या खेतों में फेंक कर आते हैं। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि उनकी आधी जिंदगी तो सिर्फ घर का गंदा पानी बाल्टियों में ढोने में ही बीत रही है।

विधानसभा उपाध्यक्ष के द्वार पहुंचे पीड़ित, मिला आश्वासन

अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके कॉलोनी के लोग रविवार को लामबंद होकर जींद के विधायक और हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा के आवास पर पहुंचे। विधायक की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि डॉ. राजन चिल्लाना को ग्रामीणों ने अपनी आपबीती सुनाई और एक लिखित ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर सामाजिक संस्था कुमाऊं सभा के महासचिव एवं मेरा संकल्प फाउंडेशन के संस्थापक गोविंद बिष्ट ने कहा कि नागरिकों की यह समस्या केवल सड़क-नाली की नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी है। टैक्स देने के बाद भी अगर लोग ऐसा जीवन जी रहे हैं, तो यह सिस्टम की नाकामी है।

ज्ञापन लेने के बाद डॉ. राजन चिल्लाना ने प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि मामला बेहद गंभीर है और वे खुद व्यक्तिगत रूप से नगर परिषद के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार से बात करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस सड़क का निर्माण और पानी की निकासी का स्थायी समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा। अब देखना यह है कि यह आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है।

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