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Jind Factory Fire: सफीदों अग्निकांड: अब तक 11 महिलाओं की मौत, रंग-गुलाल की अवैध फैक्ट्री ने ली कई जानें

AAmandeep Singh
सफीदों अग्निकांड: अब तक 11 महिलाओं की मौत, रंग-गुलाल की अवैध फैक्ट्री ने ली कई जानें
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जींद। हरियाणा के जींद जिले के सफीदों में हुए भीषण फैक्ट्री अग्निकांड के जख्म अब भी हरे हैं। सोमवार शाम पीजीआई रोहतक से आई एक खबर ने पूरे इलाके को फिर से गमगीन कर दिया। अस्पताल में उपचाराधीन 39 वर्षीय कश्मीरी देवी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कश्मीरी देवी उन बदनसीब मजदूरों में शामिल थीं, जो होली के लिए गुलाल बनाते समय अचानक भड़की आग की चपेट में आ गई थीं। इस मौत के साथ ही अब इस अग्निकांड में मरने वाली महिला मजदूरों का आंकड़ा बढ़कर 11 हो गया है, जबकि 6 अन्य मजदूर अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में अपनी आखिरी सांसों के लिए लड़ रहे हैं।

मौत की फैक्ट्री: 22 मजदूर और वो खौफनाक मंजर

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7 मार्च का वो दिन सफीदों की गीता कॉलोनी के लिए किसी काल से कम नहीं था। एक अवैध रिहायशी इलाके में चल रही रंग-गुलाल बनाने की फैक्ट्री में जब आग लगी, तब अंदर कुल 22 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें 17 महिलाएं और 5 पुरुष शामिल थे। आग इतनी तेजी से फैली कि भागने का मौका तक नहीं मिला।  हालांकि, चार जांबाज महिला मजदूरों ने छत से छलांग लगाकर अपनी जान बचा ली, लेकिन बाकी 18 लोग आग की लपटों में घिर गए। हादसे वाले दिन ही पूजा, पिंकी, गुड्डी और ऊषा की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि अन्य महिलाओं की मौत इलाज के दौरान धीरे-धीरे होती रही।

पुलिसिया कार्रवाई: SIT की रडार पर अन्य आरोपी

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एएसपी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस ने मामले में फैक्ट्री मालिक समेत चार लोगों को नामजद किया है और कई अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत गैर-इरदतन हत्या का मामला दर्ज किया है। सफीदों शहर थाना प्रभारी पूर्णदास ने पुष्टि की है कि अब तक तीन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पुलिस की टीमें फरार चल रहे अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।

अवैध फैक्ट्रियों पर उठे सवाल

इस हादसे ने रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रही अवैध फैक्ट्रियों पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। बिना किसी फायर एनओसी (NOC) और सुरक्षा मानकों के चल रही इस गुलाल फैक्ट्री ने 11 परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन इन अवैध इकाइयों पर नकेल कसता, तो शायद इन महिलाओं को अपनी जान न गंवानी पड़ती। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने और दोषियों को सख्त सजा दिलवाने की है।

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