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Julana Mandi Strike: जुलाना में बवाल: किसान नेता ने दी अंगूठा काटकर सीएम को भेजने की चेतावनी, मंडी में हड़ताल जारी

AAmandeep Singh
जुलाना में बवाल: किसान नेता ने दी अंगूठा काटकर सीएम को भेजने की चेतावनी, मंडी में हड़ताल जारी
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जींद। जींद के जुलाना कस्बे में नई अनाज मंडी इन दिनों व्यापारिक गतिविधियों के बजाय नारों और विरोध प्रदर्शनों का अखाड़ा बनी हुई है। सरकार द्वारा अनाज खरीद में लागू किए गए नए नियमों, खासकर बायोमेट्रिक हाजिरी की अनिवार्य शर्त ने आढ़तियों और किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन भी मंडी में एक दाने की खरीद नहीं हुई। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान पवन लाठर की अगुवाई में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार इन ‘काले नियमों’ को वापस नहीं लेती, तब तक मंडियों के ताले नहीं खुलेंगे।

नरेश ढांडा का बड़ा ऐलान: दो दिन की मोहलत, फिर खूनी विरोध

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धरने के दौरान माहौल उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गया जब किसान नेता और ढांडा खाप के पूर्व प्रधान नरेश ढांडा ने मंच से एक चौंकाने वाली घोषणा कर दी। सरकार के अड़ियल रवैये पर बरसते हुए उन्होंने कहा, “अगर सरकार ने अगले दो दिनों के भीतर बायोमेट्रिक के इस तुगलकी फरमान को वापस नहीं लिया, तो मैं अपना अंगूठा काटकर सीधे मुख्यमंत्री को भेज दूंगा।” ढांडा के इस बयान ने न केवल प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि आंदोलन को एक उग्र मोड़ दे दिया है। किसानों का तर्क है कि बायोमेट्रिक प्रणाली से खरीद प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी और तकनीकी खामियों के कारण किसान मंडियों में ही फंसा रह जाएगा।

मंडी में पसरा सन्नाटा, ठप रहा करोड़ों का कारोबार

हड़ताल के दूसरे दिन जुलाना मंडी में सन्नाटा पसरा रहा। जो किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे थे, उन्हें बैरंग लौटना पड़ा या फिर खुले आसमान के नीचे अपनी उपज की रखवाली करनी पड़ रही है। पवन लाठर ने कहा कि सरकार जानबूझकर आढ़तियों और किसानों के बीच के पुराने रिश्ते को खत्म करना चाहती है। मंडी के गेट पर डटे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल आढ़तियों की नहीं, बल्कि हर उस किसान की है जो अपनी मेहनत की कमाई का वाजिब दाम और आसान खरीद प्रक्रिया चाहता है।

सरकार बनाम संगठन: आर-पार की लड़ाई के आसार

फिलहाल जुलाना की इस हड़ताल ने आसपास के क्षेत्रों में भी हलचल तेज कर दी है। खाप पंचायतों और किसान संगठनों के इस आंदोलन में कूदने से खट्टर-सैनी सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या वार्ता का प्रस्ताव नहीं आया है, जिससे गतिरोध और गहराने की आशंका है। यदि नरेश ढांडा की चेतावनी के अनुरूप कोई कदम उठाया गया, तो प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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