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Julana Mandi Farmer Protest: जुलाना मंडी में किसान का अनोखा प्रदर्शन: ट्रैक्टर छोड़ बैलगाड़ी पर गेहूं लेकर पहुंचा, ढोल बजाकर जताया विरोध

AAmandeep Singh
जुलाना मंडी में किसान का अनोखा प्रदर्शन: ट्रैक्टर छोड़ बैलगाड़ी पर गेहूं लेकर पहुंचा, ढोल बजाकर जताया विरोध
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जींद। हरियाणा में अनाज की मंडियां इन दिनों गेहूं की आवक से गुलजार हैं, लेकिन जुलाना की नई अनाज मंडी में वीरवार को एक ऐसा नजारा दिखा जिसने सरकार और प्रशासन की ‘डिजिटल मंडी’ की दावों की हवा निकाल दी। गतौली गांव के किसान नरेश ढांडा ने अपनी गेहूं की उपज को मंडी तक पहुंचाने के लिए आधुनिक ट्रैक्टर का नहीं, बल्कि पुरखों की बैलगाड़ी का सहारा लिया। नरेश जब ढोल बजाते हुए बैलगाड़ी के साथ मंडी के गेट पर पहुंचे, तो वहां मौजूद व्यापारी, मजदूर और अन्य किसान अपनी फसल छोड़ इस ‘विंटेज’ विरोध को देखने जुट गए। किसान का यह तरीका सरकार द्वारा मंडियों में लागू किए गए जटिल नियमों और तकनीकी अनिवार्यताओं के खिलाफ एक सांकेतिक चोट थी।

“नंबर प्लेट का झमेला न पोर्टल की मार”

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बैलगाड़ी पर फसल लाने के पीछे के तर्क ने अधिकारियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। किसान नरेश ढांडा ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार रोज नए कानून थोप रही है। कभी ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट अनिवार्य कर दी जाती है, तो कभी बायोमेट्रिक और पोर्टल की तकनीकी खामियां किसान का रास्ता रोक लेती हैं। बैलगाड़ी लाने का फायदा यह है कि न तो मुझे नंबर प्लेट की चिंता है, न ही गेट पास के लिए घंटों लाइन में लगकर सर्वर डाउन होने का डर। इसमें पुराने तरीके से काम भी हो रहा है और गेट पास भी बिना किसी चिक-चिक के मिल गया।”

तकनीकी बाधाओं से परेशान हैं छोटे किसान

नरेश ने मंडी में अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि कई बार छोटे किसानों के पास आधुनिक दस्तावेज या स्मार्टफोन की सुविधा नहीं होती। बायोमेट्रिक प्रणाली और ऑनलाइन पंजीकरण के चक्कर में किसान को अपनी ही फसल बेचने के लिए ‘अपराधी’ की तरह इधर-उधर भटकना पड़ता है। इसी परेशानी को उजागर करने के लिए उन्होंने बैलगाड़ी को माध्यम बनाया ताकि सरकार तक यह बात पहुंचे कि किसान अब इन कागजी और तकनीकी पेचीदगियों से आजिज आ चुका है।

मार्केट कमेटी ने भी मानी ‘बैलगाड़ी’ की सहूलियत

हैरानी की बात यह रही कि जहां ट्रैक्टर वालों को लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, वहीं मार्केट कमेटी के कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि बैलगाड़ी में फसल लाने वाले किसानों को गेट पास देने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आई। चूंकि बैलगाड़ी पर नंबर प्लेट की अनिवार्यता नहीं है और यह पुराने नियमों के तहत सुगम है, इसलिए किसान का काम फटाफट हो गया। जुलाना मंडी में दिन भर यह वाकया चर्चा का विषय बना रहा और लोग इसे किसान की ‘डिजिटल सिस्टम’ पर करारी चपत बता रहे हैं।

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