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Pollution Control Board Kaithal: कैथल के बरोट में 15 एकड़ में जलाई पराली, प्रदूषण बोर्ड ने आग बुझाई, अब किसानों पर गिरेगी गाज

GGaganpreet Kaur
कैथल के बरोट में 15 एकड़ में जलाई पराली, प्रदूषण बोर्ड ने आग बुझाई, अब किसानों पर गिरेगी गाज
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कैथल । जिला प्रशासन और कृषि विभाग की तमाम अपीलों और सख्ती के दावों को धता बताते हुए कैथल के गांवों में फसल अवशेष जलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। ताजा मामला गांव बरोट का है, जहां बुधवार शाम करीब 15 एकड़ रकबे में धान और गेहूं के अवशेषों (फाने) में आग लगा दी गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचकर न केवल आग बुझवाई, बल्कि अब दोषी किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उनकी जमीन की ‘रेड एंट्री’ करने की सिफारिश भी कर दी है।

अंधेरे का फायदा उठाकर ‘सेटेलाइट’ को चकमा देने की कोशिश

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प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, किसान अब आगजनी के लिए शाम और रात के वक्त को चुन रहे हैं। इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं— पहली यह कि देर शाम तक सेटेलाइट की निगरानी सुस्त पड़ जाती है और दूसरी यह कि सरकारी अमला दफ्तरों से घर जा चुका होता है।

बुधवार देर शाम जब प्रदूषण बोर्ड के एसडीओ हरप्रीत सिंह की टीम ढांड क्षेत्र के दौरे पर थी, तो उन्हें बरोट गांव के खेतों से आग की लपटें उठती दिखाई दीं। टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर डायल-112 और दमकल विभाग की गाड़ियों को फोन किया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। संयोग अच्छा रहा कि उस वक्त चल रही तेज आंधी ने आग को और विकराल रूप नहीं लेने दिया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

207 लोकेशन फिर भी ‘शून्य’ कार्रवाई, विभाग के तर्क अजीब

हैरानी की बात यह है कि चालू सीजन के दौरान अब तक जिले में करीब 207 जगहों पर आगजनी की लोकेशन ट्रेस हो चुकी हैं। बावजूद इसके, कृषि विभाग की ओर से अभी तक एक भी किसान पर न तो केस दर्ज हुआ है और न ही जुर्माना लगाया गया है। विभाग का इस पर अजीबोगरीब तर्क है कि ये आग किसानों ने नहीं लगाई, बल्कि ‘अचानक’ लग गई थी। हालांकि, बरोट की घटना के बाद प्रदूषण बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है और क्षेत्रीय अधिकारी प्रवीन कुमार के निर्देश पर दोषियों की सूची कृषि विभाग को सौंप दी गई है।

प्रोत्साहन राशि भी बेअसर, दांव पर जमीन की सेहत

सरकार एक तरफ फसल अवशेष न जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ किसान शॉर्टकट अपनाकर पर्यावरण और अपनी जमीन की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अवशेष जलाने से न केवल वायु प्रदूषण फैलता है, बल्कि जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी खत्म हो जाती है।

प्रदूषण बोर्ड का एक्शन प्लान:

केस दर्ज: दोषी किसानों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश।

जुर्माना: 15 एकड़ के रकबे के हिसाब से भारी आर्थिक दंड।

रेड एंट्री: किसानों के मेरी फसल-मेरा ब्यौरा रिकॉर्ड में रेड एंट्री, जिससे भविष्य में सरकारी सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल, एसडीओ डॉ. सतीश कुमार, हरप्रीत सिंह और मंदीप पठानिया की टीमें पूरे जिले में डेरा डाले हुए हैं। बरोट की इस घटना ने साफ कर दिया है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी बड़ा फासला है, जिसे पाटने के लिए प्रशासन को और अधिक कड़े कदम उठाने होंगे।

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