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Kaithal News: 42 लाख के कर्ज तले दबा परिवार, अमेरिका से आया बेटे का शव तो टयोंठा गांव में छाया मातम

Kaithal News: 42 लाख के कर्ज तले दबा परिवार, अमेरिका से आया बेटे का शव तो टयोंठा गांव में छाया मातम

42 लाख के कर्ज तले दबा परिवार, अमेरिका से आया बेटे का शव तो टयोंठा गांव में छाया मातम

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GGaganpreet Kaur

Kaithal News: सुखी भविष्य और परिवार को गरीबी के दलदल से निकालने का सपना लेकर सात समंदर पार गए कैथल जिले के एक और नौजवान की दुखद दास्तान सामने आई है। पूंडरी क्षेत्र के टयोंठा गांव निवासी 26 वर्षीय अजय चौधरी का पार्थिव शरीर बुधवार को जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। करीब 15 दिन पहले अमेरिका के शिकागो में अचानक हुई ब्रेन हेमरेज की वजह से अजय ने दम तोड़ दिया था। दोस्तों, रिश्तेदारों और सामाजिक संस्थाओं के कड़े प्रयासों के बाद शव को भारत लाया जा सका, जहां गांव के श्मशान घाट पर चचेरे भाई चिराग ने नम आंखों से अजय को मुखाग्नि दी।

15 दिन पहले शिकागो में हुआ था ब्रेन हेमरेज

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परिजनों के अनुसार, अजय पिछले तीन सालों से अमेरिका के शिकागो शहर में रह रहा था और वहां एक राशन (ग्रॉसरी) के स्टोर पर काम करके अपने परिवार का सहारा बनने की कोशिश कर रहा था। 15 दिन पहले अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद पास में रहने वाले उसके साथियों ने बिना देर किए उसे अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अचानक आई इस खबर ने भारत में बैठे उसके परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया।

42 लाख रुपये का कर्ज लेकर भेजा था विदेश

अजय के चाचा विनोद कुमार ने भारी मन से बताया कि उनका परिवार महज पौना एकड़ जमीन पर खेती-बाड़ी करके अपना गुजारा चलाता है। घर में पिता धर्म सिंह, मां रेखा रानी और एक छोटी बहन हैं। परिवार की माली हालत सुधारने के लिए परिजनों ने अपनी जमा-पूंजी के साथ-साथ दोस्तों व रिश्तेदारों से कर्ज लेकर लगभग 42 लाख रुपये जुटाए थे और तीन साल पहले अजय को अमेरिका भेजा था। परिजनों को उम्मीद थी कि बेटा वहां जाकर मेहनत करेगा और जल्द ही सिर से सारा कर्ज उतर जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

अंतिम यात्रा में उमड़ा पूरा गांव

बुधवार को जब अजय का शव गांव पहुंचा, तो हर किसी की आंखें नम थीं। अंतिम यात्रा में टयोंठा सहित आसपास के कई गांवों के लोग, रिश्तेदार और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। जिस बेटे के सहारे पूरा परिवार अपनी तंगहाली दूर करने के सपने देख रहा था, आज उसकी मौत के बाद पूरे घर के अरमान आंसुओं में बह गए हैं और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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