कैथल। कैथल को खुले में शौच मुक्त (ODF) बनाने के सरकारी ढिंढोरे की हवा खुद शहर की सड़कें और चौक-चौराहे दे रहे हैं। धरातल पर हकीकत यह है कि नगर परिषद की घोर लापरवाही के चलते शहर के सार्वजनिक शौचालय आम जनता के इस्तेमाल के लायक ही नहीं बचे हैं। हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद प्रशासन कागजों में हर साल इन शौचालयों की देखरेख और सफाई व्यवस्था के नाम पर 20 से 24 लाख रुपये से अधिक का बजट ठिकाने लगा रहा है, लेकिन जब कोई राहगीर या महिला मजबूरी में इन शौचालयों का रुख करती है, तो वहां ताले लटके मिलते हैं या फिर इतनी भीषण गंदगी होती है कि भीतर पैर रखना भी दूभर हो जाता है।
परशुराम चौक से ढांड रोड तक… वीआईपी इलाकों का सबसे बुरा हाल
‘जग मार्ग’ की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि करीब 10 साल पहले शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 40 सार्वजनिक शौचालय जनता की सहूलियत के लिए बनाए गए थे। इनमें से कई जगहों पर आधुनिक प्री-फैब्रिकेटेड टॉयलेट भी रखे गए थे, जो आज कबाड़ बनकर एक तरफ टूटे पड़े हैं। उदाहरण के तौर पर, शहर के सबसे व्यस्त परशुराम चौक पर बने पुरुष शौचालय पर ताला जड़ा हुआ है, जबकि महिला शौचालय का गेट जंग खाकर जाम हो चुका है। यही हाल ढांड रोड पर पूर्व विधायक लीला राम की कोठी के पास बने शौचालय का है; वहां दिखावे के लिए पानी की टंकी तो रख दी गई है, लेकिन उसमें पानी की एक बूंद तक नहीं है। फ्लश टूटी हुई है और गंदगी का पानी अंदर जमा होने से उठती सड़ांध दूर-दूर तक पीछा नहीं छोड़ती।
मंडी और पार्कों में बदहाली: महिलाएं असुरक्षित, दुकानदार परेशान
शौचालयों की इस दुर्दशा का खामियाजा सबसे ज्यादा महिलाओं और स्थानीय दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है। शहर की मुख्य सब्जी मंडी में बने शौचालय की हालत यह है कि महिला शौचालय के ठीक सामने सब्जी की दुकानें सजती हैं, जिससे महिलाएं वहां जाने से कतराती हैं। खुराना रोड और उद्यम सिंह पार्क के पास बने शौचालयों में यूरिनल पाइप गायब हैं, टाइलें उखड़ी पड़ी हैं और वाशबेसिन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। शाम होते ही इन शौचालयों में लाइट न होने से अंधेरा छा जाता है, जिससे असामाजिक तत्वों का डेरा जमा होने का खतरा भी बना रहता है।
कागजों की सफाई से उबले शहरवासी, अफसर का पुराना राग
शहर के निवासी रामजुवारी, बंटी और विनोद ने तीखा रोष जताते हुए कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं, वहीं कैथल का स्थानीय प्रशासन लोगों को खुले में जाने के लिए मजबूर कर रहा है। जब मुख्य बाजारों में ही शौचालय बंद पड़े हैं, तो स्वच्छ भारत अभियान केवल एक मजाक बनकर रह जाता है। इस पूरे मामले पर जब कैथल नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (EO) संदीप सोलंकी से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह रटा-रटाया आश्वासन दिया। संदीप सोलंकी ने कहा कि कुछ जगहों पर नए सार्वजनिक शौचालय बनाने का काम शुरू कर दिया गया है और पुराने शौचालयों की भी जल्द ही विशेष सफाई करवा दी जाएगी ताकि लोगों को कोई दिक्कत न हो। अब देखना यह है कि लाखों का बजट डकारने वाले इस महकमे की नींद कब टूटती है।

