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कैथल में दर्दनाक हादसा: 11वीं में आए 65% नंबर, छात्र ने डिप्रेशन में आकर दी जान

GGaganpreet Kaur
कैथल में दर्दनाक हादसा: 11वीं में आए 65% नंबर, छात्र ने डिप्रेशन में आकर दी जान
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कैथल। हरियाणा के कैथल जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक छात्र ने केवल इसलिए मौत को गले लगा लिया क्योंकि उसे परीक्षा में अपनी उम्मीद से कम नंबर मिले थे। 16 साल का विवेक, जो अब 12वीं कक्षा में दाखिल हो चुका था, पिछले कुछ दिनों से गुमसुम रहने लगा था। मार्च में आए 11वीं के नतीजों में उसे 65 प्रतिशत अंक मिले थे, जिसे वह अपनी नाकामी मान बैठा और इसी डिप्रेशन में आकर उसने घर के पंखे से तौलिए का फंदा बनाकर सुसाइड कर लिया।

“65 प्रतिशत पर टूट गया विवेक” – पिता का दर्द

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विवेक के पिता रामकुमार, जो मेहनत-मजदूरी कर और ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, उन्होंने रोते हुए बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में अच्छा था। लेकिन जब से 11वीं का रिजल्ट आया था, वह शांत रहने लगा था। उसे लग रहा था कि 65 फीसदी अंक उसके करियर के लिए काफी नहीं हैं। पिता ने बताया कि आज सुबह जब वे विवेक के कमरे में गए, तो वहां का मंजर देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। विवेक फंदे पर झूल रहा था। बदहवास पिता ने तुरंत उसे नीचे उतारा और पास के निजी अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक दबाव पर उठते सवाल

पड़ोसी शेर सिंह और अन्य परिजनों का कहना है कि विवेक को लेकर परिवार ने काफी सपने संजोए थे। घर का इकलौता बेटा होने के कारण उस पर खुद को साबित करने का एक मनोवैज्ञानिक दबाव था। कैथल के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला यह छात्र शायद इस बात को नहीं समझ पाया कि एक मार्कशीट उसकी जिंदगी की कीमत से बड़ी नहीं हो सकती। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची अनाज मंडी चौकी पुलिस ने स्थिति का जायजा लिया और शव को नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखवाया।

पुलिस ने की इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई

अनाज मंडी चौकी इंचार्ज सुरेश कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि विवेक के पिता के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह मामला अत्यधिक मानसिक तनाव और कम अंकों के कारण आत्महत्या का ही लग रहा है। पुलिस ने धारा 174 के तहत इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई की है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों और शिक्षकों के सामने बच्चों की काउंसिलिंग और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है।

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