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Kaithal youth dies in America: अमेरिका में टैक्सी चलाने वाले कैथल के युवक का निधन, बूढ़े माता-पिता ने सरकार से मांगी शव लाने की गुहार

GGaganpreet Kaur
अमेरिका में टैक्सी चलाने वाले कैथल के युवक का निधन, बूढ़े माता-पिता ने सरकार से मांगी शव लाने की गुहार
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कैथल। हरियाणा के युवाओं में विदेश जाने का क्रेज और उसके लिए अपनाए जाने वाले खतरनाक रास्ते कई बार परिवारों को कभी न भूलने वाले जख्म दे जाते हैं। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला कैथल के गांव पबनावा से सामने आया है। यहां के रहने वाले 37 वर्षीय मनीष कुमार की अमेरिका में अचानक हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से मौत हो गई। मनीष वहां किराये की गाड़ी चलाकर अपने परिवार का पेट पाल रहा था। गुरुवार देर रात जब वह अपने कमरे पर था, तो अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया। साथ रहने वाले अन्य भारतीय युवकों ने जब मनीष को अचेत अवस्था में देखा, तो तुरंत इसकी सूचना कैथल में रह रहे उसके परिजनों को दी।

डेढ़ एकड़ जमीन बेची, डंकी रूट का खतरा उठाया ताकि सुधर सकें हालात

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मनीष की बुजुर्ग मां केलो देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि परिवार के हालात ठीक नहीं थे, जिसके चलते करीब चार साल पहले उन्होंने अपनी करीब डेढ़ एकड़ जमीन बेचकर मनीष को अमेरिका भेजने का फैसला किया था। सीधा वीजा न मिलने के कारण मनीष ने एजेंटों के झांसे में आकर डंकी रूट जैसा जानलेवा रास्ता चुना और कई देशों की खाक छानते हुए अमेरिका दाखिल हुआ। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा वहां सेटल होकर कर्ज उतारेगा और घर की गरीबी दूर करेगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता सुरजन सिंह अब बेहद बुजुर्ग हो चुके हैं और मनीष ही पूरे घर में कमाने वाला अकेला शख्स था।

‘मां अभी गाड़ी चला रहा हूं, बाद में बात करूंगा’— आखिरी शब्द बन गए याद

मनीष अपने पीछे माता-पिता के अलावा अपनी पत्नी, चार बहनें और एक 13 साल का बेटा छोड़ गया है। मौत के कुछ घंटे पहले ही उसने घर पर फोन किया था। मां केलो देवी ने बताया कि जब उन्होंने बेटे से बात करनी चाही तो मनीष ने कहा था, “मां, अभी मैं ड्यूटी पर हूं और गाड़ी चला रहा हूं, कमरे पर पहुंचकर आराम से बात करूंगा।” किसी को नहीं पता था कि मनीष की जुबान से निकले यह शब्द आखिरी साबित होंगे। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है। ग्रामीणों और परिजनों ने केंद्र सरकार व विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है कि मनीष के शव को जल्द से जल्द पबनावा गांव लाने का प्रबंध किया जाए, ताकि बुजुर्ग माता-पिता अपने इकलौते बेटे के अंतिम दर्शन कर सकें।

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