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Karnal Animal Fair: करनाल पशु मेले में छाई चन्नौ गाय, एक दिन में 77 किलो दूध देकर जीती प्रतियोगिता

AAmandeep Singh
करनाल पशु मेले में छाई चन्नौ गाय, एक दिन में 77 किलो दूध देकर जीती प्रतियोगिता
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करनाल। हरियाणा के डेयरी हब माने जाने वाले करनाल में आयोजित पशु मेले में इस बार एक गाय ने पशुपालकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। झिंझाड़ी गांव के डेयरी फार्म की गाय चन्नौ ने दूध उत्पादन प्रतियोगिता में 24 घंटे के भीतर करीब 77 किलोग्राम, यानी लगभग 78 लीटर दूध देकर पहला स्थान हासिल किया। करनाल के इस मेले में पहुंचे पशुपालकों और डेयरी विशेषज्ञों ने इस प्रदर्शन को देखकर मालिक और गाय दोनों की जमकर सराहना की।

यह प्रतियोगिता हर साल डेयरी सेक्टर में बेहतर नस्ल और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की जाती है। इस बार झिंझाड़ी गांव के डेयरी संचालक सुनील मेहला की गायों ने कई श्रेणियों में बाजी मारी।

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झिंझाड़ी के डेयरी फार्म ने जीते कई स्थान

झिंझाड़ी गांव के पशुपालक सुनील मेहला पांच गायों के साथ प्रतियोगिता में पहुंचे थे। इनमें से एक गाय ने करीब 78 लीटर दूध दिया, जबकि बाकी गायों ने लगभग 74 लीटर दूध उत्पादन किया।

इन शानदार आंकड़ों के साथ उनकी गायों ने प्रतियोगिता में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। इससे मेले में मौजूद पशुपालकों के बीच झिंझाड़ी गांव की डेयरी का नाम चर्चा में आ गया।

2016 से शुरू किया डेयरी व्यवसाय

सुनील मेहला ने बताया कि उनके गांव में सिल्लु और शैंकी डेयरी फार्म संचालित होता है। उनका पूरा परिवार कई वर्षों से डेयरी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि 2016 में डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे इसे बढ़ाते गए। 2018 के बाद से उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर होने वाली पशु प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। तब से उनके फार्म के पशु कई जगहों पर पुरस्कार जीत चुके हैं।

200 पशुओं के साथ चलता है डेयरी फार्म

सुनील मेहला के डेयरी फार्म में करीब 200 पशु हैं। इतने बड़े फार्म को संभालने के लिए परिवार और कर्मचारियों की टीम मिलकर काम करती है। उनका कहना है कि पशुओं की देखभाल और सही खान-पान ही अच्छे दूध उत्पादन की असली वजह है।

पशुओं के खान-पान पर खास ध्यान

सुनील मेहला के अनुसार उनकी गायों को नियमित रूप से साइलेज, हरा चारा, फीड और तूड़ी दी जाती है। मौसम के अनुसार पशुओं को ठंड और गर्मी से बचाने के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि कई बार उनकी गायों को खरीदने के लिए बड़े ऑफर आए, लेकिन उन्होंने उन्हें बेचने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि ये गायें परिवार का हिस्सा हैं और इनके कारण गांव का नाम भी रोशन होता है।

डेयरी किसानों के लिए क्या मायने

करनाल और आसपास के जिलों में डेयरी व्यवसाय बड़ी संख्या में किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे मेलों में जब किसी गाय का दूध उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचता है तो दूसरे पशुपालकों को भी बेहतर नस्ल, पोषण और प्रबंधन के बारे में नई जानकारी मिलती है।

इसी वजह से करनाल जैसे डेयरी केंद्रों में आयोजित पशु मेले किसानों के लिए सीख और प्रेरणा का बड़ा मंच बनते जा रहे हैं।

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