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Karnal Police Accused By Trader: करनाल में खाकी पर दाग! व्यापारी को दुकान से उठाकर 3 घंटे थाने में बिठाने के आरोप में एएसआई पर शिकायत

GGaganpreet Kaur
करनाल में खाकी पर दाग! व्यापारी को दुकान से उठाकर 3 घंटे थाने में बिठाने के आरोप में एएसआई पर शिकायत
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करनाल। करनाल का सिविल लाइन थाना क्षेत्र इन दिनों पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर शहर के व्यापारिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला एक रसूखदार दुकान के कब्जे और उसमें पुलिस की कथित एंट्री से जुड़ा है। करनाल के पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई एक लिखित शिकायत में स्थानीय व्यापारी सचिन गुप्ता ने सिविल लाइन थाने की एएसआई आशा रानी और दो अन्य पुलिसकर्मियों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं।

शिकायत के अनुसार, बीती 26 मई को एएसआई आशा रानी बिना किसी कानूनी नोटिस या वारंट के दो सिपाहियों के साथ सचिन की दुकान ‘सिंगला स्टोर्स’ पर धमक पड़ीं। आरोप है कि वहां सरेबाजार व्यापारी को जबरन सरकारी गाड़ी में ठूंसा गया और थाने ले आया गया, जिससे बाजार में उनकी सामाजिक साख को गहरा धक्का लगा।

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“थाने को बना दिया कोर्ट”— 3 घंटे तक बंधक बनाकर चाबियां सौंपने का बनाया दबाव

सचिन गुप्ता ने एसपी को बताया कि थाने के भीतर उनके साथ किसी शातिर अपराधी जैसा बर्ताव किया गया। उन्हें करीब तीन घंटे तक अवैध हिरासत में रखा गया। इस दौरान एएसआई आशा रानी कथित तौर पर उन पर यह दबाव बनाती रहीं कि वे दुकान नंबर 23 का कब्जा तुरंत छोड़ दें और उसकी चाबियां सविता गर्ग, श्रवण गर्ग और प्रतीक गर्ग के हवाले कर दें।

व्यापारी का पक्ष है कि उक्त दुकान में तीनों पक्ष कानूनी रूप से बराबर के हिस्सेदार हैं और पिछले 18 महीनों से इस दुकान का वास्तविक और भौतिक कब्जा उनके पास है। आरोप है कि इसी कब्जे को गैर-कानूनी तरीके से दूसरी पार्टी को दिलाने के लिए पुलिस ने मध्यस्थ की भूमिका अख्तियार कर ली।]

वकीलों और व्यापारियों की दलील भी रही बेअसर; अब एसपी की जांच पर टिकी नजर

घटना की भनक लगते ही शहर के कई नामचीन व्यापारी और पीड़ित के वकील भी सिविल लाइन थाने पहुंच गए। मौके पर पहुंचे वकील ने पुलिस अधिकारियों को समझाने की कोशिश की कि दुकान की हिस्सेदारी का यह पूरा मामला विशुद्ध रूप से एक ‘सिविल डिस्प्यूट’ (दीवानी मामला) है। इसका निपटारा या तो माननीय अदालत करेगी या फिर आपसी सहमति से मीडिएशन सेंटर में होगा, इसमें पुलिस को दखल देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन आरोप है कि एएसआई अपनी जिद पर अड़ी रहीं और दोटूक कह दिया कि “फैसला तो यहीं थाने में ही होगा।”

इस घटना से सहमे पीड़ित व्यापारी का कहना है कि पुलिस के इस पक्षपातपूर्ण रवैये से उनका पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव और सदमे में है। बरसों की कमाई इज्जत पल भर में खाक में मिल गई। सचिन गुप्ता ने पुलिस अधीक्षक से एएसआई आशा रानी और उनके साथ शामिल स्टाफ के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही दूसरी पार्टी से अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिला पुलिस कप्तान क्या रुख अपनाते हैं और खाकी की निष्पक्षता बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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