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Karnal DC Office Clerk Bribe Case: करनाल डीसी ऑफिस में विजिलेंस का छापा: आर्म्स लाइसेंस के नाम पर साढ़े 3 लाख की डील करने वाला बाबू गिरफ्तार

GGaganpreet Kaur
करनाल डीसी ऑफिस में विजिलेंस का छापा: आर्म्स लाइसेंस के नाम पर साढ़े 3 लाख की डील करने वाला बाबू गिरफ्तार
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करनाल। हरियाणा में सरकारी दफ्तरों के भीतर पैर पसार चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस का डंडा एक बार फिर चला है। करनाल में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर डीसी कार्यालय के असलहा विभाग में तैनात क्लर्क अनिल कुमार को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया। प्रशासनिक गलियारे की नाक के नीचे चल रहे इस रिश्वतखोरी के खेल का भंडाफोड़ तब हुआ, जब एक परेशान शिकायतकर्ता ने सिस्टम के आगे घुटने टेकने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।

साढ़े तीन लाख में तय हुआ था सौदा; होमगार्ड सर्टिफिकेट के नाम पर मांगी घूस

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एसीबी की तफ्तीश में जो कड़ियां सामने आई हैं, वे हैरान करने वाली हैं। आरोपी क्लर्क अनिल कुमार ने एक आवेदक से आर्म्स लाइसेंस बनवाने के नाम पर पूरे साढ़े तीन लाख रुपये का सौदा तय किया था। इस जटिल प्रक्रिया को आसान बनाने और फाइल को आगे बढ़ाने के लिए उसने आवेदक को झांसा दिया कि पहले एक होमगार्ड का सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य है। इसी सर्टिफिकेट के इंतजाम के एवज में क्लर्क ने 20 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की थी। सौदा दो किस्तों में तय हुआ, जिसके तहत 10 हजार रुपये आरोपी पहले ही डकार चुका था और बाकी के 10 हजार रुपये के लिए उसने आवेदक को दोबारा बुलाया था।

नोटों पर लगा केमिकल पाउडर और बिछ गया जाल; ऐसे दबोचा गया आरोपी

बार-बार पैसों की मांग से तंग आकर पीड़ित ने मामले की लिखित शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी। शिकायत मिलते ही एसीबी की टीम हरकत में आई और ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में एक पुख्ता रणनीति तैयार की गई। जाल बिछाने के लिए पीड़ित को दिए गए नोटों पर विशेष केमिकल पाउडर लगाया गया और सरकारी गवाहों के सामने उन नोटों की सीरीज व नंबर डायरी में दर्ज किए गए। जैसे ही शिकायतकर्ता सोमवार को क्लर्क अनिल कुमार के पास पहुंचा और उसने रिश्वत के 10 हजार रुपये आरोपी के हाथ में थमाए, वैसे ही इशारा मिलते ही सादे कपड़ों में मुस्तैद एसीबी की टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। केमिकल टेस्ट के दौरान जब आरोपी के हाथ धुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया, जिसने उसके गुनाह पर मुहर लगा दी।

जांच अधिकारी का बयान: क्या इस खेल में शामिल हैं बड़े चेहरे?

मामले की जानकारी देते हुए एसीबी के जांच अधिकारी सुलतान सिंह ने बताया कि आरोपी अनिल कुमार को पुख्ता सबूतों और रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने आर्म्स लाइसेंस की फाइल पास कराने का पूरा जिम्मा अपने सिर लिया हुआ था। अब ब्यूरो की टीमें इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही हैं कि क्या इस अवैध वसूली के खेल में डीसी दफ्तर के कुछ और बड़े अधिकारी या कर्मचारी भी हिस्सेदार हैं? पुलिस आरोपी के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है ताकि यह साफ हो सके कि वह अब तक कितने लोगों को इस तरह अपनी ठगी का शिकार बना चुका है।

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