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Karnal Drone Survey: हाई-टेक होगा करनाल! 1122 हेक्टेयर ज़मीन का ड्रोन सर्वे करेगा सटीक मैपिंग, जानें पूरा प्लान

AAmandeep Singh
हाई-टेक होगा करनाल! 1122 हेक्टेयर ज़मीन का ड्रोन सर्वे करेगा सटीक मैपिंग, जानें पूरा प्लान
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करनाल।  हरियाणा के विकास मानचित्र पर अब करनाल का गांव कोहंड एक नई डिजिटल पहचान के साथ उभरने जा रहा है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इस इलाके के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब पटवारियों के फीते और पुराने नक्शों के बजाय, आसमान से ‘हाई-टेक ड्रोन’ कोहंड की ज़मीन का सटीक हिसाब-किताब लेंगे। करीब 1122.60 हेक्टेयर क्षेत्र में होने वाले इस सर्वे के लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्यों खास है यह ड्रोन प्रोजेक्ट?

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अक्सर देखा जाता है कि ज़मीन के रिकॉर्ड और धरातल की हकीकत में अंतर होने के कारण विकास योजनाएं लटक जाती हैं। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एग्जिस्टिंग लैंड यूज़ (ELU) प्लान तैयार किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में ज़मीन का क्या इस्तेमाल हो रहा है—कहाँ मकान हैं, कहाँ खेत और कहाँ सरकारी ज़मीन—इन सबका एक विस्तृत डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा।

चयनित एजेंसी को न केवल एरियल सर्वे करना होगा, बल्कि जीआईएस (GIS) और ऑटो-कैड (Auto-CAD) जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म पर इसकी मैपिंग करनी होगी।

बारीकी से होगी हर ढांचे की निशानदेही

इस सर्वे की सबसे बड़ी खूबी इसकी सटीकता है। ड्रोन के जरिए होने वाली मैपिंग में केवल बड़े रास्ते ही नहीं, बल्कि गाँव की छोटी-बड़ी भौतिक संरचनाओं को भी चिह्नित किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

इंफ्रास्ट्रक्चर: रेलवे लाइन, बिजली के पोल, पाइपलाइन और बाउंड्री वॉल।

प्राकृतिक स्रोत: नहरें, नाले, तालाब और यहाँ तक कि पेड़-पौधों की स्थिति।

कैडस्ट्रल लिंकिंग: इस डिजिटल मैप को पुराने ‘सजरा’ (कैडस्ट्रल मैप) के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे भविष्य में ज़मीन संबंधी विवादों में भी कमी आएगी।

10 दिनों के भीतर जमा करने होंगे आवेदन

विभाग ने इस परियोजना की गंभीरता को देखते हुए समय सीमा काफी सख्त रखी है। इच्छुक एजेंसियों को टेंडर नोटिस जारी होने के महज 10 दिनों के भीतर करनाल स्थित जिला टाउन प्लानर (DTP) कार्यालय में अपने आवेदन की हार्ड कॉपी जमा करानी होगी। आवेदन में तकनीकी और वित्तीय बिड (Bol) को अलग-अलग रखा गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि तय समय के बाद आने वाले किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा।

भविष्य की प्लानिंग का आधार

जानकारों का मानना है कि कोहंड में होने वाला यह सर्वे आने वाले समय में इंडस्ट्रियल हब या नई आवासीय कॉलोनियों के नियोजन में मील का पत्थर साबित होगा। जब प्रशासन के पास एक-एक इंच ज़मीन का डिजिटल ब्यौरा होगा, तो अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ हो सकेगा।

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