Karnal News: मुनीश मुंडे, करनाल। जमीन के ठेके की मामूली सी रकम एक परिवार के लिए इतनी बड़ी खूनी रंजिश बन जाएगी, शायद किसी ने सोचा भी नहीं था। करनाल जिले के गांव डाबरी में लगभग चार साल पहले घटी एक दहला देने वाली घटना में अदालत ने आखिरकार इंसाफ का पहिया घुमा दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनीश कुमार शर्मा की अदालत ने अपनी ही बहू की गोली मारकर हत्या करने और बेटे पर जानलेवा हमला करने के 75 वर्षीय दोषी महेंद्र सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि संपत्ति और पैसों के विवाद में जब रिश्तों की डोर टूटती है, तो उसका अंजाम कितना भयानक होता है।
इस पूरे मामले की जड़ में जमीन के ठेके के पैसे थे। गांव डाबरी के रहने वाले अमरजीत सिंह ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया था कि उनका परिवार एक ही छत के नीचे रहता था और उनके पास करीब चार एकड़ जमीन थी, जिसे ठेके पर उठाया जाता था। जमीन के ठेके से आने वाली रकम उसके पिता महेंद्र सिंह और छोटे भाई कुलबीर सिंह के पास रहती थी। अमरजीत उस समय अपना नया मकान बना रहा था और उसे पैसों की सख्त जरूरत थी। उसने कई बार अपने हिस्से के पैसे मांगे, लेकिन उसे टाल दिया जाता था या साफ मना कर दिया जाता था।
ट्यूबवेल का फ्यूज निकालने पर भड़का था विवाद
विवाद तब और गहरा गया जब 8 जून 2021 को अमरजीत खेत में गया और उसने गुस्से में या अपनी जरूरत के चलते ट्यूबवेल का फ्यूज निकालकर अपने पास रख लिया। जब जमीन के ठेकेदार ने यह बात उसके पिता और भाई को बताई, तो घर का क्लेश और ज्यादा बढ़ गया। बात इतनी बढ़ गई कि बुजुर्ग पिता के दिल में गुस्से की ऐसी आग भड़की कि उसने अपने ही घर को खून से लाल कर दिया।
घटना उसी दिन यानी 8 जून 2021 की रात करीब नौ बजे की है। अमरजीत अपनी पत्नी कुलविंद्र कौर के साथ घर के आंगन में कामकाज में व्यस्त था। अचानक उसका 75 वर्षीय पिता महेंद्र सिंह अपनी लाइसेंसी बंदूक लेकर वहां आन धमका। बुजुर्ग ने गुस्से में आकर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी और बिना एक पल गंवाए दनादन गोलियां चलानी शुरू कर दीं। एक गोली सीधे कुलविंद्र कौर को लगी और वह लहूलुहान होकर वहीं ढेर हो गई।
बेटे पर भी की ताबड़तोड़ फायरिंग, कमरे में छिपकर बचाई जान
बहू को गिराने के बाद भी आरोपी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने अपने बेटे अमरजीत को भी निशाना बनाते हुए गोलियां चला दीं। अपनी जान बचाने के लिए अमरजीत दौड़कर एक कमरे में घुसा और भीतर से दरवाजा बंद कर लिया। आरोप है कि इसके बाद भी क्रूरता की हद पार करते हुए आरोपी ने दरवाजे और खिड़कियों पर गोलियां बरसाईं। जब गोलीबारी थमी और उसने बाहर आकर देखा, तो उसकी पत्नी की सांसें थम चुकी थीं और चारों तरफ खून फैला हुआ था।
घटना की सूचना मिलते ही थाना सदर करनाल की पुलिस टीम तुरंत गांव डाबरी पहुंची। मौके पर कुलविंद्र कौर का शव मिला, जिसे देखकर हर कोई सन्न रह गया। पुलिस ने फॉरेंसिक और अपराध जांच टीम को बुलाकर तमाम साक्ष्य जुटाए। पीड़ित के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर 9 जून 2021 को ही हत्या, हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।
अदालत का कड़ा फैसला, उम्रकैद और जुर्माना
राज्य की ओर से पैरवी कर रहे उप जिला न्यायवादी सचिन कुमार ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने महेंद्र सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। यदि जुर्माना नहीं भरा गया, तो एक साल की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। इसके साथ ही, शस्त्र अधिनियम की धारा के तहत सात साल की सजा और 50 हजार का जुर्माना तथा मारपीट के मामले में छह महीने की सजा सुनाई गई है। अदालत ने साफ किया है कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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